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मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना व्यापार घाटा, क्या बजट में होगा समाधान

6 महीने के उच्चतम स्तर पर भारत का व्यापार घाटा कच्चे तेल के आयात से लगातार हो रहा है घाटे में इजाफा भारत का चीन के साथ 63 अरब डॉलर का है व्यापार घाटा

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Saurabh Sharma

Jun 15, 2019

Trade deficit

मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना व्यापार घाटा, क्या बजट में होगा समाधान

नई दिल्ली।मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के अंतिम महीने और दूसरे कार्यकाल के पहले महीने में एक बात पूरी तरह से समान रही वो है व्यापार घाटा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार व्यापार घाटा 6 महीने के उच्चतम स्तर पर है। 5 जुलाई को पूर्ण बजट 2019 है। अब सरकार के सामने इसे कम करने की बड़ी चुनौती सामने होगी। क्योंकि लगातार व्यापार घाटा बढऩे से देश की इकोनॉमी को नुकसान पहुंच रहा है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस बार मंत्रालय की ओर किस तरह के आंकड़े पेश किए हैं। साथ ही व्यापार घाटे को कम करने के लिए किस तरह के कदम उठाने जरूरी है।

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मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े
- देश के निर्यात में मई में साल-दर-साल आधार पर 3.93 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जोकि 29.99 अरब डॉलर रहा।
- पिछले साल इसी महीने में कुल 28.86 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था।
- देश का निर्यात मई महीने में 3.93 फीसदी बढ़कर 30 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
- मई में व्यापार घाटा बढ़कर छह महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
- मई में आयात भी 4.31 फीसदी बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपए (4535 करोड़ डॉलर) रहा।
- व्यापार घाटा बढ़कर 1.07 लाख करोड़ रुपए (1536 करोड़ डॉलर) पर पहुंच गया।
- पिछले साल मई में निर्यात और आयात का अंतर 1.02 लाख करोड़ रुपए (1462 करोड़ डॉलर) रहा था।
- व्यापार घाटे का यह स्तर नवंबर, 2018 के बाद से सबसे ऊंचा है।
- साल 2018 के इसी महीने में कुल 43.48 अरब डॉलर का आयात किया गया था।
- उस समय व्यापार घाटा 1.17 लाख करोड़ रुपए (1667 करोड़ डॉलर) रहा था।

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इन सामानों का हुआ सबसे ज्यादा निर्यात
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, समीक्षाधीन माह में सबसे अधिक इलेक्ट्रॉनिक सामानों, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स, ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात किया गया।

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इतना हुआ सामानों का आयात-निर्यात
- मई 2019 में गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न और आभूषण का निर्यात कुल 21.42 अरब डॉलर का रहा।
- मई 2018 में कुल 19.94 अरब डॉलर का था।
- इसमें 7.42 फीसदी की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।
- मई में तेल का आयात कुल 12.44 अरब डॉलर का रहा।
- 2018 के मई की तुलना में 8.23 फीसदी अधिक है।
- पिछले साल मई में कुल 11.50 अरब डॉलर के तेल का आयात किया गया था।
- मई 2019 में गैर-तेल आयात कुल 32.91 अरब डॉलर रहा।
- मई 2018 के 31.98 अरब डॉलर के मुकाबले 2.90 फीसदी अधिक है।

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आखिर क्यों बढ़ा व्यापार घाटा
एक्सपर्ट की मानें तो वैश्विक व्यापार में सुस्ती और कच्चे तेल के आयात का बिल बढऩे के कारण व्यापार घाटे में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। देश को कच्चे तेल की निर्भरता में कटौती करने जरुरत है। ताकि व्यापार घाटे में कमी की जा सके। आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल कच्चे तेल के आयात और उसके बिल में इजाफा हो रहा है। वहीं प्रोडक्शन कत होने के कारण अप्रैल मई में तेल की कीमतें अपने चरम पर थी। जिसके कारण व्यापार घाटे में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है।

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सरकार को किन मुद्दों पर देना होगा ध्यान
व्यापार घाटे को कम करने के लिए कम लिए कई मुद्दों पर सोचने की जरुरत है। जानकारों के अनुसार सरकार को वस्तुओं के निर्यातकों के लिए कर्ज की उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा। ताकि वो निर्यात को अधिक से अधिक बढ़ा सके। क्योंकि जितना हम आयात करते हैं। उसके मुकाबले निर्यात में काफी कमी है। ऐसे में सरकार इस बारे में सोचने की जरुरत है। कर्ज की लागत के साथ सभी कृषि निर्यात पर ब्याज सब्सिडी के मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। आपको बता दें कि व्यापार घाटे का सीधा असर देश की आर्थिक स्थिति विशेषकर चालू खाते, रोजग़ार, विकास दर और मुद्रा के मूल्य पर पड़ता है। जानकारों की मानें तो यदि किसी देश का व्यापार घाटा लंबे समय तक बना रहता है तो उस देश की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ता है। चालू खाते के घाटे पर व्यापार घाटे का नकारात्मक असर पड़ता है।

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क्यों है व्यापार घाटा चिंता का विषय
- वित्त वर्ष 2017-18 में भारत ने करीब 238 देशों के साथ कुल 768 अरब डॉलर का व्यापार यानी 303 अरब डॉलर निर्यात और 465 अरब डॉलर आयात किया।
- इस अवधि में भारत का व्यापार घाटा 162 अरब डॉलर रहा।
- 130 देशों के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस था जबकि करीब 88 देशों के साथ ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) रहा।
- भारत का सबसे अधिक व्यापार घाटा चीन के साथ 63 अरब डॉलर है। यानी चीन के साथ व्यापार भारत के हित में कम तथा चीन के लिए अधिक फायदेमंद है।
- चीन की तरह स्विट्जऱलैंड, सऊदी अरब, इराक, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, नाइजीरिया, कतर, रूस, जापान और जर्मनी जैसे देशों के साथ भी भारत का व्यापार घाटा अधिक है।
- अमरीका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस सबसे ज्यादा 21 अरब डॉलर है। भारत का अमरीका से आयात कम और निर्यात ज्यादा होता है।
- अमरीका की तरह बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल, हॉन्गकॉन्ग, नीदरलैंड्स, पाकिस्तान, वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों के साथ भी भारत का ट्रेड सरप्लस है।

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