
Punjab Army Schools Language Policy (Image- ChatGPT)
Army Schools Language Policy: पंजाब में आर्मी पब्लिक स्कूलों (APS) की नई भाषा नीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES) द्वारा स्कूलों में संस्कृत को कंपलसरी और पंजाबी को ऑप्शनल सब्जेक्ट बनाने के फैसले का अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि संस्कृत को बढ़ावा देकर राज्य की मातृभाषा पंजाबी को दरकिनार किया जा रहा है, जिसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 5 मई को आर्मी पब्लिक स्कूलों ने बच्चों के माता पिता को एक मैसेज भेजा। इस मैसेज में साफ लिखा था कि, एकेडमिक सेशन 2026-27 के लिए संस्कृत पढ़ना कंपलसरी है। जो स्टूडेंट्स पंजाबी भाषा को एक अतिरिक्त विषय के तौर पर पढ़ना चाहते हैं उन्हें अपने पेरेंट्स के हस्ताक्षर वाला सहमति पत्र (कंसेंट फॉर्म) स्कूल में जमा करना होगा। खबर यह भी है कि पंजाबी पढ़ाने के लिए स्कूल तभी टीचर उपलब्ध कराएगा जब, कम से कम 15 बच्चे इसे विषय के रूप में चुनेंगे।
सेना का कहना है कि, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि, देश भर के आर्मी स्कूलों में पढ़ाई का सिलेबस एक जैसा रहे। ऐसा उन जवानों के बच्चों की सहूलियत के लिए किया गया है जिनका बार-बार ट्रांसफर होता रहता है। लेकिन इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि, यह पंजाब लर्निंग ऑफ पंजाबी एंड अदर लैंग्वेजेज एक्ट 2008 का सीधा उल्लंघन है। इस कानून के तहत पंजाब में चलने वाले किसी भी बोर्ड या मैनेजमेंट के स्कूल में कक्षा 10 तक पंजाबी पढ़ाना अनिवार्य है।
पंजाब चेतना मंच और अन्य शिक्षा कार्यकर्ताओं ने इस नीति को मनमाना बताते हुए राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान खत्म करने की कोशिश करार दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और सीबीएसई (CBSE) को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से अपील की है कि, वे पंजाबी को दोबारा अनिवार्य विषय बनाएं। उन्होंने एक्स (X) पर लिखा कि, "पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि यह पंजाब की आत्मा और पहचान है। आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जोड़े रखने के लिए आर्मी स्कूलों में पंजाबी पढ़ाना बेहद जरूरी है।"
अभिभावकों को डर है कि, इस नई नीति से उनके बच्चे अपनी मातृभाषा ठीक से नहीं सीख पाएंगे। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि, उनका मंत्रालय आर्मी स्कूलों के इस फैसले की जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि साल 2022 में भी जब ऐसा हुआ था तब, सरकार ने इन स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाया था। उस वक्त सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था कि दूसरे राज्यों से आने वाले बच्चों के लिए बड़ी कक्षाओं में पंजाबी सीखना मुश्किल होता है। बैंस ने कहा कि, हमने तभी साफ कर दिया था कि नियम के तहत पंजाबी तो पढ़ानी ही होगी। विभाग इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है।
Published on:
12 May 2026 12:28 pm
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