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UP assembly elections 2022: कांग्रेस दिग्गज शैलेंद्र किशोर पांडेय ‘मधुकर’ BJP में शामिल

वाराणसी के कैंट विधानसभा में BJP को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शैलेंद्र किशोर पांडेय शनिवार को लक्ष्मीकांत बाजपेई की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका होगा। वाराणसी में कांग्रेस की रही सही उम्मीद दम तोड़ती नजर आ रही है। रोहनिया के हर्षवर्धन सिंह के भी बीजेपी में जाने की चर्चा है।
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वाराणसी

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Ajay Chaturvedi

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Updated: 29 Jan 2022, 3:12 PM IST

शैलेंद्र किशोल पांडेय मधुकर

शैलेंद्र किशोल पांडेय मधुकर

वाराणसी. UP assembly elections 2022 पाला बदल के मामले में नया इतिहास रचता नजर आ रहा है। चुनाव अधिसूचना जारी होने के पहले से ही पाला बदल का खेल शुरू है और अब तो यह प्रक्रिया ज्यादा ही तेज होती नजर आ रही है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान में कांग्रेस ही है जो प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में यूपी में तीन दशक से खोई अपनी जमीन तलाशने को एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस दिग्गज शैलेंद्र किशोल पांडेय मधुकर अब कांग्रेस से पाला बदल कर बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले पूर्वांचल कांग्रेस का बड़ा चेहरा माने जाने वाले कुशीनगर के राजा आरपीएन सिंह कांग्रेस का दामन छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। उससे पहले बनारस और पूर्वांचल में कांग्रेस के सबसे बड़े घराने पंडित कमलापति त्रिपाठी के पौत्र पूर्व एमएलसी राजेशपति त्रिपाठी और प्रपौत्र पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर चुके हैं।

अब वाराणसी के कैंट विधानसभा में BJP को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शैलेंद्र किशोर पांडेय शनिवार को श्री लक्ष्मीकांत बाजपेई जी की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका होगा। वाराणसी में कांग्रेस की रही सही उम्मीद दम तोड़ती नजर आ रही है। रोहनिया के हर्षवर्धन सिंह के भी बीजेपी में जाने की चर्चा है।

बता दें कि मधुकर वाराणसी के औरंगाबाद हाउस के नजदीकी हैं। राजेशपति त्रिपाठी के खासमखास रहे। राजेशपति ने ही इन्हें पिछली बार एमएलसी का टिकट दिलवाया था। लेकिन वो चुनाव हार गए। इसके बाद राजेशपति के ही कहने पर पिछले निकाय चुनाव में रामनगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद पर चुनाव लड़े मगर इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

उधर जहां तक हर्षवर्धन का सवाल है तो हर्षवर्धन सेवापुरी से आते हैं और स्वतंत्रा संग्राम सेनानी परिवार से आते हैं। इनके जाने से कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है।