30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सेक्सी दुर्गा को लेकर निर्माता और सेंसर बोर्ड में ठनी, आखिर क्या है इस फिल्म में? जानें

सेक्सी दुर्गा को लेकर निर्माता और सेंसर बोर्ड में ठनी, आखिर क्या है इस फिल्म में? जानें    
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Dilip Chaturvedi

•

Updated: 27 Sep 2017, 4:33 PM IST

SEXY DURGA

SEXY DURGA

तिरुवनंतपुरम के एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता ने अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अपनी फिल्म 'सेक्सी दुर्गा' को मंजूरी देने के लिए सेंसर बोर्ड से लड़ाई शुरू कर दी है। सनल कुमार शशिधरन की यह मलयालम फिल्म 23 सालों में पहली भारतीय फिल्म है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव रॉटरडैम (आईएफएफआर) में टाइगर पुरस्कार मिलने वाला है। फिल्म निर्माता ने कहा, "इस फिल्म को अगले माह होने वाले स्टार 2017 मुंबई फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किए जाने पर सेंसर बोर्ड ने रोक लगा दी थी, क्योंकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निष्कर्ष निकाला था कि इस फिल्म के कारण लोगों की "धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और कानून व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।"







फिल्म पर रोक से शशिधरन परेशान और नाराज हैं। उन्होंने यह तक कह दिया कि भारत 'ईरान जैसा देश बनता जा रहा है।' शशिधरन ने बताया, "मैं सेंसर बोर्ड की राय का इंतजार कर रहा हूं। मैं इसके लिए लडऩे जा रहा हूं, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कलात्मक चीज रचने की स्वतंत्रता का सवाल है... मैं चुप नहीं बैठूंगा। मैं इसके लिए कोर्ट जाऊंगा... इस लड़ाई के लिए जो भी कर सकता हूं, करूंगा।"
बता दें कि राजश्री देशपांडे और कन्नन नायर अभिनीत 'सेक्सी दुर्गा' एक ऐसी फिल्म है, जिसमें यह दिखाया गया है कि एक पुरुष प्रधान समाज में जुनून और पूजा कैसे तेजी से उत्पीडऩ और शक्ति के दुरुपयोग की मानसिकता पैदा करती है। उन्होंने कहा, "दुर्गा फिल्म का नायक है।"

फिल्म निर्माता ने कहा, "मेरा कहने का मतलब है, भारत में दुर्गा नाम बड़ा ही सामान्य है। यह केवल देवी का नाम नहीं है। यहां कई इंसानों का नाम दुर्गा है। लेकिन आप देख सकते हैं कि उनके साथ इंसानों जैसा बर्ताव तक नहीं किया जाता। जब उन्हें मदद की जरूरत होती है, तब लोग उन्हें नकार देते हैं। लेकिन जब एक फिल्म का शीर्षक इस नाम से आता है तो लोग चिल्लाने लगते हैं, रोने लगते हैं और कहते हैं कि इससे हमारी धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।" उन्होंने कहा, "भारतीय फिल्म निर्माता सच्चाई पर आधारित फिल्में बनाने का साहस दिखाते हैं, इसके लिए आंदोलन करते हैं, और वे (सरकार) उस आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। यह बहुत ही मुश्किल समय है।"

महोत्सव की निदेशक स्मृति किरण ने आईएएनएस को बताया, "हमें थिएटर में फिल्में चलाने के लिए सेंसर से छूट या प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है। शशिधरन ने अब सेंसर प्रमाणीकरण के लिए आवेदन किया है और हमें उम्मीद है कि वह इसे प्राप्त कर लेंगे, ताकि हम इसे महोत्सव में देख सकें।"