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‘मां शर्मिला टैगोर ने दी इस्लाम की सीख’, मंदिर नहीं जाता सैफ का परिवार? सबा पटौदी ने किया खुलासा

Saba Ali Khan On Practicing Islam: सैफ अली खान की बहन सबा अली पटौदी ने हाल ही में अपने परिवार के धार्मिक विचारों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि वो कभी मंदिर नहीं गए।
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Saba Ali Khan On Practicing Islam

सबा अली खान का इंटरव्यू (फोटो सोर्स- Instagram/sabapataudi)

Saba Ali Khan On Practicing Islam: बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की शादी हमेशा से ही लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि से आते थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना परिवार प्यार और आपसी सम्मान के साथ आगे बढ़ाया। अब उनकी बेटी सबा अली खान पटौदी ने अपने बचपन और परिवार में धर्म को लेकर एक अहम बात साझा की है।

शर्मिला टैगोर ने बच्चों को इस्लाम से कराया परिचित

सबा पटौदी ने हाल ही में 'बिग बॉलीवुड बफ्स' एक बातचीत के दौरान बताया कि उनकी मां शर्मिला टैगोर ने उन्हें और उनके भाई-बहनों को इस्लाम की बुनियादी समझ दी थी। सबा ने कहा कि वो खुद को धार्मिक और आध्यात्मिक मानती हैं और इस्लाम से उनका गहरा जुड़ाव है।

सबा के मुताबिक, उनके माता-पिता की शादी के बाद शर्मिला टैगोर ने इस्लाम अपना लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने बच्चों को भी इस धर्म की परंपराओं और मान्यताओं से परिचित कराया। सबा ने बताया कि उनकी मां ने उन्हें रमजान और इस्लाम से जुड़ी कई चीजों के बारे में समझाया, ताकि बच्चों को अपनी धार्मिक पहचान को लेकर एक आधार मिल सके।

घर में नहीं होती थी किसी धर्म को मानने की जबरदस्ती

सबा ने ये भी साफ किया कि उनके माता-पिता ने कभी बच्चों पर धर्म थोपने की कोशिश नहीं की। उन्होंने बताया कि उन्हें अपनी आस्था को लेकर आगे चलकर खुद फैसला करने की आजादी थी।

उनके मुताबिक, परिवार में किसी एक धार्मिक विचारधारा को लेकर दबाव नहीं बनाया गया। यही वजह है कि आज भी पटौदी परिवार के अलग-अलग सदस्यों की अपनी व्यक्तिगत मान्यताएं हैं।

सैफ और सोहा ने की इंटरफेथ शादी

सबा ने अपने भाई सैफ अली खान और बहन सोहा अली खान का उदाहरण देते हुए बताया कि दोनों ने अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों में शादी की है। उनके मुताबिक, परिवार में आस्था को हमेशा निजी विषय माना गया है।

सबा का मानना है कि धर्म व्यक्ति की निजी पसंद है और इसे किसी दूसरे व्यक्ति पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिवार अलग-अलग त्योहारों को मनाते हुए बड़ा हुआ है। क्रिसमस से लेकर दिवाली और होली तक, परिवार में विभिन्न अवसरों की खुशियां साझा की जाती थीं।

शर्मिला और मंसूर की शादी आसान नहीं थी

शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान पटौदी ने 1968 में शादी की थी। यह शादी उस दौर में काफी चर्चित रही, क्योंकि दोनों अलग धार्मिक पृष्ठभूमि से थे। शर्मिला ने शादी के बाद इस्लाम अपनाया और उनका नाम आयशा रखा गया था।

बाद में एक बातचीत में शर्मिला ने भी अपने धर्म परिवर्तन के अनुभव को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि यह उनके लिए जीवन का एक गंभीर फैसला था, जिसे उन्होंने पूरी समझ के साथ स्वीकार किया।

शादी के बाद मिली थीं धमकियां

शर्मिला टैगोर ने ये भी बताया था कि जब उनकी और मंसूर अली खान पटौदी की शादी की खबर सामने आई, तो उन्हें विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा था। उस समय सामाजिक और धार्मिक मतभेदों के कारण इस रिश्ते को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

हालांकि, दोनों ने इन चुनौतियों के बावजूद अपना रिश्ता कायम रखा और अपने बच्चों की परवरिश ऐसे माहौल में की, जहां अलग-अलग संस्कृतियों और त्योहारों के लिए सम्मान की भावना रही। आज सबा पटौदी की बातों से एक बार फिर इस चर्चित परिवार की निजी जिंदगी और परवरिश की झलक सामने आई है।