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शताब्दी-राजधानी और दुरंतो एक्सप्रेस से हटेंगे जनरेटर यान

- प्रदूषण घटाने की पहल, इंजन से होगी बिजली सप्लाई, एक कोच भी बढ़ेगा, शुुरुआत शताब्दी एक्सप्रेस से होगी
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इटावा

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Alok Pandey

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Updated: 31 May 2018, 11:04 PM IST

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शताब्दी-राजधानी और दुरंतो एक्सप्रेस से हटेंगे जनरेटर यान

इटावा . भाप के इंजन से तौबा करने के बाद रेलवे अब डीजल लोकोमोटिव यानी डीजल इंजन से परहेज करेगा। जल्द ही समस्त इलेक्ट्रिक ट्रैक से डीजल इंजन हटा लिए जाएंगे। इसके साथ ही वीआईपी ट्रेनों से जनरेटर यान भी हटेंगे। नई व्यवस्था के तहत ट्रेनों में अत्याधुनिक (डब्ल्यूएपी-7) इंजन लगाकर इनके जरिए ही कोच में बिजली सप्लाई होगी। जेनरेटर हटाने की शुरुआत दो महीने के अंदर कानपुर शताब्दी से होगी। दावा है कि इस व्यवस्था से प्लेटफॉर्मों पर ध्वनि प्रदूषण कम होगा, साथ ही वायु प्रदूषण से कुछ हद तक निजात मिलेगी।

बचेगा डीजल का खर्च, यात्री क्षमता भी बढ़ेगी

वीआईपी ट्रेनों से जेनरेटर यान हटाने से अव्वल डीजल पर होने वाला खर्च बचेगा। रेलवे यात्रिकी विभाग के पंकज अहिरवार ने बताया कि बिजली खपत से डीजल खर्च लगभग चार गुना अधिक होता है। इसके अलावा बड़ा फायदा यह होगा कि बिजली खर्च पर देय राशि देश में ही रहती है, जबकि डीजल खपत का पैसा विदेश पहुंच जाता है। रेलवे के मुताबिक, ट्रेनों में लगने वाले अत्याधुनिक इंजनों में लोड कन्वर्टर लगा होता है। इसके जरिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन से आने वाली 11000 वोल्ट की बिजली को कन्वर्टर 220 वाट में बदलकर ट्रेन के कोच में सप्लाई करेगा। इसी बिजली के जरिए कोच के एसी, लाइट, पंखे और अन्य उपकरण संचालित होंगे। अभी तक देश की सभी वीआईपी ट्रेनों में जनरेटर से बिजली सप्लाई होती है।


जनरेटर यान हटने से यात्रियों की क्षमता भी बढ़ेगी

ट्रेनों से जनरेटर यान हटने से यात्रियों का सीधा फायदा भी होगा। जनरेटर यान कोच हटने के बाद इसकी जगह एक यात्री कोच को बढ़ाया जाएगा। जाहिर है कि प्रत्येक यात्रा में कम से कम 72 यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलना पक्का हो जाएगा। रेल अफसरों ने बताया कि पहले चरण में कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस से जेनरेटर यान हटाकर एसी चेयरकार कोच लगाया जाएगा। इसके बाद कानपुर सेंट्रल से गुजरने वाली अन्य सभी राजधानी, दुरंतो और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों के जनरेटर यान हटाए जाएंगे। गौरतलब है कि अभी वीआईपी ट्रेनों में दो जनरेटर यान लगते हैं। फिलहाल सभी ट्रेनों से एक जेनरेटर यान ही हटाया जाएगा, ताकि आपातकाल में दूसरे जनरेटर यान से बिजली सप्लाई को चालू किया जा सके।


देश में सबसे पहले कालका शताब्दी से हटा था जेनरेटर यान

जर्मन तकनीक पर ट्रेनों के आधुनिक इंजनों में होटल लोड कन्वर्टर वर्ष 1994 में लगाया गया था। इसके बाद कोचों में बिजली सप्लाई की फिटिंग करने की डिजाइन तैयार हुई। रेलवे के वरिष्ठ विद्युत अभियंता एवं इलेक्ट्रिक ट्रेनिंग सेंटर के पूर्व प्राचार्य गणेश ने बताया कि वर्ष 2009 में कालका शताब्दी में इसे लगाया गया। उस वक्त ट्रेन में जनरेटर कोच हटाने के बाद एसी चेयरकार कोच बढ़ाया गया था।