इस परीक्षा को पास करने वाले कैंडिडेट्स को इसके बाद इंटरव्यू देना था, इसके बाद फाइनल सेलेक्शन किया जाना था, लेकिन अब जबकि कोई भी कैंडिडेट लिखित परीक्षा पास नहीं कर पाया है तो इंटरव्यू का तो सवाल ही नहीं उठता। उधर इस मामले पर सियासत भी गर्माने लगी है। आम आदमी पार्टी के गोवा जनरल सचिव प्रदीप पडगाउंकर ने देरी से रिजल्ट घोषित करने की निंदा की है और कहा है कि 8000 कैंडिडेट्स का फेल होना राज्य के एजुकेशन सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यह गोवा यूनिवर्सिटी और कॉमर्स कॉलेजिस के लिए शर्म की बात है, जिन्होंने ऐसे ग्रेजुएट्स तैयार किए हैं। हालांकि इस मामले में अब सरकार का अगला कदम क्या होगा फिलहाल यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है। यह परीक्षा रद्द की जाएगी, या मिनिमम पासिंग मार्क्स में कटौती की जाएगी इसके बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।