
3000 तक पेंशन पाने के लिए क्या करें किसान, PC- Chatgpt
देश के छोटे और सीमांत किसानों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) चला रही है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की सुनिश्चित पेंशन देने का प्रावधान है। खास बात यह है कि किसानों को अपनी उम्र के अनुसार केवल 55 से 200 रुपये तक मासिक अंशदान करना होता है और केंद्र सरकार भी उनके बराबर राशि पेंशन फंड में जमा करती है। योजना का उद्देश्य उन किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, जिनके पास वृद्धावस्था में नियमित आमदनी का पर्याप्त साधन नहीं होता।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना की शुरुआत 12 सितंबर 2019 को हुई थी। सितंबर 2026 में योजना के सात वर्ष पूरे हो चुके हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2026 तक देशभर में 24.96 लाख से अधिक किसान इस योजना में पंजीकरण करा चुके थे।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना में शामिल होने के लिए किसान की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उसके पास अधिकतम दो हेक्टेयर तक खेती योग्य भूमि होना आवश्यक है। इसके अलावा संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के भूमि रिकॉर्ड में किसान का नाम एक अगस्त 2019 तक दर्ज होना चाहिए।
यह स्वैच्छिक और अंशदान आधारित पेंशन योजना है। इसमें महिला और पुरुष दोनों किसान पात्रता की शर्तें पूरी करने पर शामिल हो सकते हैं। हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित अपात्रता संबंधी शर्तों को पूरा नहीं करना भी आवश्यक है।
योजना में किसान का मासिक अंशदान उसकी नामांकन के समय की उम्र पर निर्भर करता है। यदि कोई किसान 18 वर्ष की उम्र में योजना से जुड़ता है, तो उसे हर महीने 55 रुपये जमा करने होंगे। केंद्र सरकार भी इतनी ही राशि जमा करेगी। इस प्रकार पेंशन फंड में कुल 110 रुपये प्रति माह जाएंगे।
वहीं, 40 वर्ष की उम्र में योजना से जुड़ने वाले किसान को हर महीने 200 रुपये देने होंगे और सरकार भी 200 रुपये का योगदान करेगी। इस स्थिति में कुल मासिक अंशदान 400 रुपये होगा।
योजना के नियमों के अनुसार, पात्र सदस्य के 60 वर्ष की आयु पूरी करने और आवश्यक अंशदान शर्तों का पालन करने पर उसे हर महीने 3,000 रुपये की सुनिश्चित पेंशन मिलेगी।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना में पारिवारिक पेंशन का भी प्रावधान है। यदि पेंशन प्राप्त कर रहे किसान की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन की 50 प्रतिशत राशि यानी 1,500 रुपये प्रति माह मिल सकती है। यह पारिवारिक पेंशन केवल पति या पत्नी के लिए है। इसके लिए आवश्यक है कि जीवनसाथी पहले से इसी योजना का लाभार्थी न हो। यदि किसान की मृत्यु 60 वर्ष की आयु से पहले हो जाती है और उसने नियमित अंशदान किया है, तो जीवनसाथी निर्धारित योगदान देकर योजना जारी रख सकता है। दूसरा विकल्प योजना के निकासी नियमों के अनुसार बाहर निकलने का है।
योजना में कुछ श्रेणियों को पात्रता से बाहर रखा गया है। इनमें एनपीएस, ईएसआईसी और ईपीएफओ जैसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत आने वाले किसान शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन और प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना के सदस्य भी इसमें शामिल नहीं हो सकते।
इसके अलावा संस्थागत भूमि धारक, आयकरदाता, संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्ति, कुछ निर्वाचित जनप्रतिनिधि, नियमित सरकारी कर्मचारी और निर्धारित पेशेवर श्रेणियां भी अपात्र हैं। हालांकि, मल्टी टास्किंग स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी और ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए संबंधित अपात्रता नियम में अपवाद दिया गया है। अन्य पात्रता शर्तें फिर भी लागू होंगी।
योजना में नामांकन के लिए पात्र किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी से संपर्क कर सकते हैं। वहां आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है। भूमि रिकॉर्ड संबंधी जानकारी भी पात्रता की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण है।
सीएससी संचालक किसान का विवरण दर्ज कर ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करता है। इसके बाद किसान को ऑटो-डेबिट मैंडेट पर सहमति देनी होती है, जिसके आधार पर निर्धारित अंशदान बैंक खाते से काटा जाता है। सफल पंजीकरण के बाद किसान को पेंशन खाता संख्या और पेंशन कार्ड उपलब्ध कराया जाता है।
केंद्र सरकार द्वारा 11 सितंबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, छह फरवरी 2026 तक देशभर में 24,96,252 किसान योजना में पंजीकृत थे। हरियाणा लगभग 5.75 लाख नामांकन के साथ पहले स्थान पर था। बिहार में 3.46 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया था। उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी प्रत्येक राज्य से 2.5 लाख से अधिक किसान योजना से जुड़े थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक योजना के कार्यान्वयन और विस्तार पर कुल 540.66 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया था।
किसानों को आवेदन करने से पहले अपनी उम्र, भूमि रिकॉर्ड और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सदस्यता की जांच करनी चाहिए। बैंक खाते में निर्धारित अंशदान के लिए पर्याप्त राशि रखना भी जरूरी है। यदि पति-पत्नी दोनों स्वतंत्र रूप से सभी पात्रता शर्तें पूरी करते हैं, तो दोनों के अलग-अलग नामांकन की संभावना हो सकती है। हालांकि, प्रत्येक मामले में पात्रता की जांच आवश्यक है। इसे बिना सत्यापन के परिवार को 6,000 रुपये मासिक पेंशन मिलने की गारंटी नहीं समझना चाहिए। किसानों को वर्तमान नामांकन सुविधा और आवश्यक प्रक्रिया की पुष्टि नजदीकी सीएससी या संबंधित कृषि विभाग से करनी चाहिए।
Updated on:
3 Nov 2026, 4:39 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 4:34 PM IST
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