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कमजोर मानसून से रबी फसलों की बुवाई सुस्त, गेहूं का रकबा 59 फीसदी घटा, किसानों की बढ़ी चिंता

देश में 23 अक्टूबर तक रबी फसलों की बुवाई पिछले साल से 36 प्रतिशत से अधिक पिछड़ी; राजस्थान, पंजाब और मध्य भारत में मिट्टी की नमी तथा सिंचाई के पानी की कमी बनी चुनौती, अल नीनो ने बढ़ाई मौसम की अनिश्चितता।
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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 2 Nov 2026, 3:47 PM IST

क्यों सुस्त है रबी की बुवाई, PC- Chatgpt

देश में रबी फसलों की बुवाई इस बार कमजोर मानसून और मिट्टी में नमी की कमी के बीच धीमी गति से आगे बढ़ रही है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 तक देश में कुल 18.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हुई थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 28.26 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कुल बुवाई क्षेत्र में लगभग 36.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। गेहूं, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई पिछले वर्ष के मुकाबले पीछे चल रही है। किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेतों में पर्याप्त नमी और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

मानसून में 13 प्रतिशत कम बारिश का दिख रहा असर

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून से सितंबर 2026 के दौरान देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 13 प्रतिशत कम रही। इस अवधि में देशभर में करीब 759.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा लगभग 868.6 मिलीमीटर है। मानसून की कमी का प्रभाव रबी सीजन की शुरुआत में दिखाई दे रहा है। सामान्यतः खरीफ के बाद मिट्टी में बची नमी रबी फसलों की शुरुआती बढ़वार के लिए महत्वपूर्ण होती है। बारिश कम होने से कुछ क्षेत्रों में मिट्टी की नमी घटने के साथ जलाशयों और नहरों में पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। विशेष रूप से वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

गेहूं की बुवाई में करीब 59 प्रतिशत की गिरावट

कृषि मंत्रालय के अनुसार, 23 अक्टूबर तक देश में गेहूं की बुवाई केवल 11 हजार हेक्टेयर में हुई थी। पिछले वर्ष इसी समय तक 27 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया जा चुका था। इस प्रकार शुरुआती बुवाई क्षेत्र में लगभग 59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कुछ राज्यों में गेहूं की बुवाई अभी शुरू ही हुई है। गेहूं सामान्यतः अक्टूबर और नवंबर के दौरान बोया जाता है तथा मार्च-अप्रैल में इसकी कटाई होती है। सरकार ने फसल वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 12.1 करोड़ टन निर्धारित किया है। पिछले वर्ष देश में लगभग 12.07 करोड़ टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था।

दलहन और तिलहन की खेती भी पिछड़ी

रबी सीजन में केवल गेहूं ही नहीं, दलहन और तिलहन की बुवाई भी पिछले वर्ष के मुकाबले धीमी है। 23 अक्टूबर तक दलहन की बुवाई 3.27 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 4.39 लाख हेक्टेयर थी। इसी तरह तिलहन का बुवाई क्षेत्र 21.34 लाख हेक्टेयर से घटकर 13.38 लाख हेक्टेयर रह गया।

रबी धान की बुवाई भी 2.13 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.02 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई। हालांकि, मोटे अनाज की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी हुई है। इसका क्षेत्र पिछले वर्ष के 13 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 23 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है।

राजस्थान में कम बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता

राजस्थान में कमजोर मानसून का असर रबी की तैयारियों पर दिखाई दे रहा है। राज्य में जून से सितंबर के दौरान बारिश सामान्य से लगभग 22 प्रतिशत कम रही। इसके अलावा, 1 से 18 अक्टूबर के बीच वर्षा में करीब 55 प्रतिशत की कमी दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है।

राजस्थान में 23 अक्टूबर तक लगभग 5.93 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हुई थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह क्षेत्र 14.13 लाख हेक्टेयर था। इस तरह बुवाई क्षेत्र में करीब 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

कम बारिश और मिट्टी में नमी की कमी से विशेष रूप से असिंचित क्षेत्रों में खेती प्रभावित होने की आशंका है। राजस्थान और पंजाब मिलकर देश के लगभग 31 प्रतिशत गेहूं क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इन राज्यों में पानी की उपलब्धता रबी सीजन के लिए महत्वपूर्ण है। Investing.com India+1

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी बारिश की कमी

अक्टूबर के शुरुआती 18 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश में सामान्य से 96 प्रतिशत कम बारिश दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है। इसी अवधि में महाराष्ट्र में सामान्य वर्षा का केवल तीन प्रतिशत पानी बरसा। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कई क्षेत्रों में मानसून के बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई।

ऐसी परिस्थितियों में विशेष रूप से वर्षा आधारित खेती वाले इलाकों में बुवाई से पहले सिंचाई की आवश्यकता बढ़ सकती है। हालांकि, बारिश की कमी का प्रभाव अलग-अलग जिलों में मिट्टी, फसल और सिंचाई सुविधाओं के अनुसार भिन्न हो सकता है।

अल नीनो से बढ़ सकती हैं मौसम संबंधी चुनौतियां

रबी सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति भी चिंता का विषय है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जुलाई 2026 में संसद को बताया था कि जून में अल नीनो कमजोर स्तर पर था और जुलाई में मध्यम स्तर तक पहुंच गया। मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान अल नीनो के और मजबूत होने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, अल नीनो का अर्थ यह नहीं है कि देश के सभी हिस्सों में बारिश कम होगी। इसका वास्तविक प्रभाव अन्य समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। किसानों के लिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों के आधार पर खेती की योजना बनाना महत्वपूर्ण होगा।

किसानों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रबी फसलों की सफल बुवाई के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी आवश्यक है। नमी कम होने पर बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है। किसानों को बुवाई से पहले खेत की नमी जांचने, उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का आकलन करने और स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों से सलाह लेने की जरूरत है। जहां पानी की कमी है, वहां फसल का चयन और बुवाई का समय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय करना उपयोगी होगा। हालांकि, अक्टूबर में बुवाई का रकबा कम रहने से पूरे रबी सीजन का उत्पादन घटना निश्चित नहीं है। नवंबर और दिसंबर में बुवाई की प्रगति, जलाशयों में पानी और मौसम की स्थिति अंतिम परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।