आज भी भगवान शिव के स्वरूप ये सभी एकादश रुद्र देवताओं की रक्षा के लिए स्वर्ग में विराजमान है और ईशानपुरी में निवास करते हैं। उनके अनुचर करोड़ों रुद्र कहे गये है, जो तीनों लोकों में चारों ओर स्थित है।शिवपुराण में कहा गया है कि ग्यारह रूद्रों की कथा को एकाग्रचित्त होकर पढ़ने का महान फल प्राप्त होता है। यह धन व यश देने वाला है, मनुष्य की आयु की वृद्धि करने वाला है, सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है, पापों का नाशक एवं समस्त सुख-भोग प्रदान कर अंत में मुक्ति देने वाला है।