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जनरल शाहनवाज खान को भारत से था इतना प्रेम कि पूरे परिवार को पाक में छोड़कर आ गए थे भारत

भारत आने के बाद लगातार 23 साल तक केन्द्र सरकार में रहे मंत्री
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गाज़ियाबाद

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Iftekhar Ahmed

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Updated: 15 Aug 2018, 5:08 PM IST

general Shanawaz Khan

जनरल शाहनवाज खान को भारत से था इतना प्रेम कि पूरे परिवार को पाक में छोड़कर आ गए थे भारत

गाजियाबाद. 15 अगस्त 2018 को देशभर में 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। हर ओर लोगों में देशभक्ति का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है। एक तरफ लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया गया तो वहीं दूसरी ओर जगह-जगह दफ्तरों व स्कूलों में भी तिरंगा फहराया गया। इस पावन अवसर पर हम आपको एक ऐसे पूर्व कांग्रेसी नेता के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आजादी से पहले (अविभाज्य भारत) के रावलपिंडी जिले के मटोर गांव में पैदा हुए थे। उनकी पढ़ाई भी वहीं हुई और इसके बाद में वह ब्रिटिश सेना में अफसर बन गए। इस दौरान वह ब्रिटिश सेना छोड़ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज में शामिल हो गए। उन्होंने आजादी के लिए आजाद हिन्द फौज की एक टुकड़ी के साथ बहादुरी से जंग भी लड़ी। वहीं, जब ब्रिटिश सेना ने उन्हें पकड़ा तो लाल किले में डाल दिया और उनका प्रसिद्ध लाल किला कोर्ट मार्शल ट्रायल हुआ। तब पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनके लिए वकालत की थी। इतना ही नहीं, आजाद हिन्दुस्तान में लाल किले पर ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर देश का तिरंगा लहराने वाले भी जनरल शाहनवाज़ ही थे। लेकिन जब भारत विभाजन हुआ तो उन्होंने भारत में बसने का फैसला लिया। हालांकि, उनके परिवार के सभी सदस्य उनके इस फैसले के खिलाफ थे। लिहाजा, शाहनवाज आजादी के समय जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो उन्होंने अपने पूरे परिवार को पाकिस्तान में छोड़कर खुद भारत आ गए। उनके परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटे, तीन बेटियां थीं। उन सभी को छोड़कर वह भारत आ गए थे और यहीं बस गए। इतना ही नहीं, उन्होंने ही प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की मां लतीफ फातिमा को गोद लिया था। शाहरुख के पिता शाहनवाज के साथ ही पाकिस्तान से भारत आए गए थे। इसके बाद उन्होंने दोनों की शादी भी कराई थी। गौरतलब है कि आज भी दिल्ली के लाल किले में रोज शाम छह बजे जो लाइट एंड साउंड का कार्यक्रम होता है, उसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ शाहनवाज़ की ही आवाज है।

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मेरठ से चार बार बने सांसद
शहनवाज खान भारत आने के बाद भारतीय राजनीती का हिस्सा बन गए। वह आजाद हिंदुस्तान में चार बार मेरठ से सांसद चुने गए। इतना ही नहीं, उनके जमाने में मेरठ जैसे संवेदनशील शहर में कभी कोई दंगा-फसाद भी नहीं हुआ। शाहनवाज़ ने 1952 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव मेरठ से जीता था। इसके बाद उन्होंने 1957, 1962 व 1971 में मेरठ से ही लागातार जीत हासिल की। इसके साथ ही वह 23 साल तक केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहे।

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पाकिस्तान में रह रहे बेटे की वजह फेंस गए थे विवादों में

उनका सगा बेटा 1965 की जंग के दौरान पकिस्तानी सेना में कर्नल था। जिसका नाम है महमूद अली था, जो कि बाद में और भी बड़े पद पर पहुंच गया था। 1965 की जंग में महमूद अली भारत के खिलाफ जंग में शामिल था। शाहनवाज खान उस समय भारत के केंद्रीय कृषि मंत्री थे। लिहाजा, उस समय यह बात देश में आग की तरह फैल गई थी । शाहनवाज खान के बेटे के पाकिस्तानी सेना में होने की बात सामने आने के बाद विपक्ष ने उनसे इस्तीफा मांगा था। इस बात को लेकर काफी हंगामा भी हुआ और वह सियासी दलों व संगठनों के निशाने पर आ गए थे। बताया जाता है कि उस समय शाहनवाज इतने दबाव में आ गए थे कि उन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया था। हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उस समय न केवल उनका बचाव किया, बल्कि विपक्ष से भी दो टूक कह दिया कि वह इस्तीफा कतई नहीं देंगे। अगर उनका बेटा दुश्मन देश की सेना में बड़ा अधिकारी है तो इसमें उनकी क्या गलती है।

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