
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गाजियाबाद. योगी सरकार (UP Government) भले ही अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों पर तमाम तरह से शिकंजा कस रही हो और भ्रष्टाचार (Corruption) पर जीरो टॉलरेंस की बात करती हो। लेकिन, कुछ सरकारी कर्मचारी ऐसे हैं, जो अभी भी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद के स्वास्थ्य विभाग (Ghaziabad Health Department) में देखने को मिला है। जहां मलेरिया विभाग (Malaria Department) पदस्थ एक इंस्पेक्टर पिछले चार साल से घर बैठकर वेतन ले रहा है। बड़ी बात यह है कि वह रहता भी लखनऊ में है और गाजियाबाद कागजों में ड्यूटी चल रही है। यह मामला उस वक्त सामने आया जब नोडल अधिकारी को मिली गोपनीय सूचना के बाद छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया अविनाश नाम का इंस्पेक्टर उन्होंने पिछले 4 साल से यहां नहीं देखा है। फिलहाल नोडल अधिकारी ने इस पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। हाजिरी रजिस्टर के साथ-साथ तमाम दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।
गाजियाबाद मलेरिया विभाग (Ghaziabad Malaria Department) में अविनाश नाम का एक इंस्पेक्टर पिछले 4 साल से घर बैठकर वेतन ले रहा है। आश्चर्य की बात है कि अविनाश सिंह लखनऊ में रहकर गाजियाबाद के मलेरिया विभाग में ड्यूटी कर रहा है। यह गोपनीय सूचना नोडल अधिकारी सेंथल पांडियन को मिली तो उन्होंने मलेरिया विभाग में औचक निरीक्षण किया। इसके बाद पूरा मामला उजागर हुआ। शुरुआती जांच में पता चला कि जिला मलेरिया अधिकारी से मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था। नोडल अधिकारी की छापेमारी के दौरान वहां पर तैनात खंड कर्मचारियों से इस पूरे मामले की जानकारी ली गई तो विभाग के अन्य कर्मियों ने बताया कि उन्होंने पिछले 4 साल से अविनाश सिंह को नही देखा है।
बताया जा रहा है कि मलेरिया ऑफिसर ज्ञानेंद्र मिश्र यहां पिछले 22 साल से तैनात हैं और 22 साल से जिले में तैनात जिला मलेरिया अफसर ज्ञानेंद्र मिश्र की सरपरस्ती में यह फर्जीवाड़ा चल रहा था। क्योंकि हाजिरी का रजिस्टर भी मलेरिया अफसर के पास ही रहता है। छापेमारी के बाद नोडल अधिकारी पूरे एक्शन में हैं तो वहीं ज्ञानेंद्र मिश्र अविनाश को बचाने में जुटा हुआ है। इसके अलावा अभी 20 से अधिक ऐसे कर्मचारियों के नाम सामने आ रहे हैं, जो हाजिरी लगाकर काम नहीं करते हैं। सूत्रों की मानें तो मलेरिया अफसर के द्वारा ही हाजरी लगाकर वेतन उठाने के मामले में कमीशनखोरी होती है।
Published on:
19 May 2021 12:10 pm
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