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दीक्षांत समारोह में बोले इसरो प्रमुखः उन सपनों का पीछा करो जो उम्मीद से परे हो

मुख्यअतिथि के रूप में दीक्षांत समारोह में मौजूद रहे के.सिवन
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गोरखपुर

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 26 Oct 2018, 3:50 PM IST

ISRO Chief K.Sivan

दीक्षांत समारोह में बोले इसरो प्रमुखः उन सपनों का पीछा करो जो उम्मीद से परे हो

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के 37वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि इसरो के चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने कहा, ‘मैंने जीवन में जब जब कुछ हासिल करना चाहा, लेकिन वह नहीं मिला। उसकी बजाय कुछ और मिला। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपको कोई चीज नहीं मिलती तो आपको कोई बड़ी चीज मिलने वाली है। कुछ नया करने को रिस्क लेना पड़ता है। खतरों से खलेना पड़ता है।
दीक्षांत में शामिल छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए इसरो प्रमुख ने कहा कि कल जब आप राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी कमर कसेंगे तो तीन चीजें हैं जो आपके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। पहला अपने डर पर विजय प्राप्त करना। दूसरा निर्धारित जोखिम उठाना। तीसरा ऐसी विचारधारा जो नवोन्मेष हो। नई ऊंचाइयों व सफलता को पाने के लिए नवाचार व सकारात्मक सोच का होना आवश्यक है।

अजीबो गरीब विचारों को मत छोड़िए...

डाॅ.के सिवन ने कहा ’मेरी आप सभी लोगों को सलाह है कि कुछ नया करने का खतरा उठाइए बिना इस डर के कि आप सफल होंगे। हो सकता है कि असफलता मिले लेकिन हर असफलता हमें कुछ नया करने के लिए अगला कदम उठाने का मौका देगी। हमें दो में से किसी एक को चुनना है या तो हम आरामदायक स्थिति में बने रहे व कुछ भी नया ना करें या फिर आराम की स्थिति से बाहर आकर थोड़ा खतरा उठाएं। यदि आप हमेशा आरामदायक स्थिति में रहना चुनते हैं तो एक समय के बाद प्रतिस्पर्धा के खेल से आप बाहर हो जाएंगे।

उन्होंने कहा, ’अपने अजीबोगरीब विचारों को छोड़ मत दीजिए क्योंकि वास्तविकता यह है कि दुनिया के बहुत से सफलतम अविष्कार इन ही अजीबोगरीब विचारों के कारण हुए हैं। हमेशा सीखते रहिए ।’

प्रस्ताव मिला तो डीडीयू में भी खोलेंगे अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र

इसरो प्रमुख ने कहा, ‘मेरा विचार है राष्ट्र के विकास के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकी आवश्यक है। मैने कल ही कुलपति जी से कहा कि यदि गोरखपुर विवि हमें प्रस्ताव भेजे तो हम यहां भी अंतरिक्ष विज्ञान का कोई केंद्र खोलना चाहेंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया, ’मैं फिर कहूंगा कि चांद के लिए उछाल भरो। अगर तुम चूक जाओगे तो सितारों तक पहुंच सकते हो। खुशियां बांटो। अपने उन सपनों का पीछा करो जो उम्मीद से परे है। और जाओ दिलचस्प अनोखी और शानदार गलतियां करो। नियमों को तोड़ो और दुनिया को अधिक आनंददायक बनाओ।’