
गोरखपुर। नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां पर रविवार को मुफ्ती अख्तर हुसैन (मुफ्ती-ए-गोरखपुर) ने मिस्र की सूफी मस्जिद पर हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मृतकों के लिए दुआ की।
उन्होंने कहा कि नबी-ए-पाक ने 14 सौ साल पहले पूरी दुनिया को शिक्षा हासिल करने, बेटी बचाओ व स्वच्छता का संदेश दिया। इसी वजह से इस्लाम में पाकी (स्वच्छता) को आधा ईमान करार दिया गया है। कुरआन की पहली आयत का नुजूल लफ्ज़े 'इक़रा' से हुआ हैं यानी पढ़ों। मजदूरों के हक की आवाज सबसे पहले नबी-ए-पाक ने उठायीं और पसीना सूखने से पहले मजदूरी देने का हुक्म दिया। विधवा से शादी करके महिलाओं का सम्मान बढ़ाया। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिया। पत्थर खाकर, जुल्म सहकर भी दुआएं दी और अंहिसा का पैगाम दिया।
मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि सारी दुनिया कुरआन से फायदा हासिल कर रही है, मगर हम कुरआन वाले होकर कुरआन का फैज नहीं पा रहे है इसकी वजह कुरआन से दूरी है। मुसलमान अगर कुरआन में गौरों फिक्र करना शुरु कर दें तो सारी समस्याओं का हल मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि कुरआन का तर्जुमा सिर्फ आला हजरत का कंजुल ईमान ही पढ़िए। आला हजरत का तर्जुमा पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा छपता और पढ़ा जाता हैं।
इस दौरान मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, कारी महबूब आल, इं. अहमद फराज, दरगाह सदर इकरार अहमद, मंजूर आलम,शाह आलम, शहादत हुसैन, रमजान, कुतबुद्दीन अब्दुल अजीज, सैफ अली, मो. अजीम, कैश रजा, मो. इब्राहीम सहित तमाम लोग मौजूद रहे.
मूए मुबारक की जियारत में उमड़े अकीदतमंद
पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के मूए मुबारक (पवित्र बाल) की जियारत सलातों-सलाम के बीच रविवार को दीवान बाजार स्थित ख्वाजा नासिर अली के मकान पर बाद नमाज जोहर हुई। जियारत से पहले मिलाद हुआ। जिसमें हाफिज मोहम्मद कासिम अली रजवीं ने मूए मुबारक की फजीलत हदीस की रौशनी में बयान की। ख्वाजा नासिर ने लोगों को जियारत करायी। इसके बाद शीरनी तकसीम की गयी। इस दौरान मो. वारिस अली, रेहान फरीद, मोहम्मद फहीम, नजमूल हक मारूफी, फैजुल हक, सैयद यामीनुज जफर, मो. आसिम, ताहिर रजी, आदिल, मो. अहमद आसफी, अली वसीम सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
Published on:
27 Nov 2017, 12:38 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.