
ग्रेटर नोएडा. स्कूल की बस खराब हो जाने की वजह से सोमवार को 2 स्कूलों के 50 से अधिक स्टूडेंट्स को घर पहुंचने में घंटों लग गए। उधर बच्चे समय से घर न पहुंचने की वजह से पैरेंट्स की जान भी अटक गई। आनन-फानन में कई पैरेंट्स स्कूल पहुंचे और अपने बच्चों को लेकर घर चले गए। हालांकि बाद में स्कूल मैनेजमेंट ने बच्चों को दूसरी बस से घर पहुंचाया। पैरेंट्स का आरोप है कि बस के ड्राइवर की तरफ से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी। अब ये मामला प्रशासनिक अफसरों तक जा पहुंचा है। डीएम ने निजी ट्रॉसपोर्टर के खिलाफ जांच के निर्देश दे दिए हैं।
जानकारी के अनुसार सेंट जोसफ और जीसस मैरी स्कूल में एक निजी ट्रॉसपोर्टर की बस चलती है। स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि उनकी तरफ से कोई बस सर्विस प्रोवाइड नहीं कराई जाती है। बच्चों को लाने और ले जाने की जिम्मेदारी खुद पैरेंट्स की होती है। बताया गया है कि पैरेंट्स अपने स्तर पर निजी ट्रॉसपोर्टर की बस को हायर करते हैं। सोमवार को नोएडा बच्चों को छोड़ने वाली बस खराब हो गई थी। इस बस मेंं सेंट जोसफ और जीसस मैरी स्कूल के बच्चे सवार थे। समय से बच्चे घर न पहुंचने पर पैरेंट्रस की टेंशन बढ़ गई। पैरेंट्स ने मामले की जानकारी बस के ड्राइवर से की तो उसने बस खराब होने की बात कही। बस खराब होने की वजह से कई पैरेंट्रस अपने बच्चों को लेकर चले गए। उसके बाद भी 40 से अधिक बच्चों को घर पहुंचने में घंटों लग गए।
पैरेंट्स का आरोप है कि ट्रॉसपोर्टर की तरफ से उन्हें सूचना समय से नहीं दी गई। वहीं स्कूल मैनेजमेंट ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मामला मीडिया में पहुंचने के बाद स्कूल मैनेजमेंट हरकत में आ गया और बच्चों को दूसरी बस से घर भेजा गया। पूरे मामले मेंं निजी ट्रॉसपोर्टर की कमी सामने आई है। डीएम बीएन सिंह ने बताया कि निजी ट्रॉसपोर्टर के खिलाफ जांच कराई जा रही है। उसके बाद ठोस कार्रवाई की जाएगी। वहीं सेंट जोसफ स्कूल के प्रिसिंपल फादर मैथ्यू का कहना है कि स्कूल की तरफ से बस सर्विस नहीं दी जाती है। बच्चों को स्कूल छोड़ने और ले जाने की जिम्मेदारी पैरेंट्स की है।
Published on:
19 Dec 2017 09:58 am
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