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आॅनलाइन पढ़ाईः अतिरिक्त डेटा, खराब नेटवर्क बन रही बाधा

Online educationकैसे पढ़े इस नई पद्धति से जब न मोबाइल न अतिरिक्त खर्च की स्थिति
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गुना

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 18 May 2020, 7:11 PM IST

आॅनलाइन पढ़ाईः अतिरिक्त डेटा, खराब नेटवर्क बन रही बाधा

आॅनलाइन पढ़ाईः अतिरिक्त डेटा, खराब नेटवर्क बन रही बाधा

गुना। क्लास 8 में पढ़ने वाली संजना को व्हाट्सअप होमवर्क पर मिलता है। लेकिन संजना के पास अपना पर्सनल फोन नहीं है। होमवर्क पापा के फोन पर आता है और जब वह फुर्सत पाकर घर आते हैं तो संजना उसे काॅपी पर नोट करती है। फिर उसे पूरा कर फोटो अपलोड कर भेजती है।
शिक्षक नरेंद्र भारद्वाज बताते हैं कि सरकारी स्कूलों के अधिकतर बच्चों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। जिनके पास फोन है उनके पास पर्याप्त डेटा नहीं होता। ऐसे में आॅनलाइन शिक्षा की पहुंच सबके पास होना संभव नहीं।
आॅनलाइन शिक्षा (Online education) के क्षेत्र में आ रही दिक्कतों की यह बानगी मात्र है। यह हर दूसरे छात्र व शिक्षक की परेशानी हैं जिससे वह रोज दोचार हो रहे हैं।

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दरअसल, कोरोना काल (Corona period) ने हमारे जीवन में तमाम बदलाव लाए हैं। सुविधाभोगियों के लिए यह बदलाव तो आसान है लेकिन तमाम बदलाव आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के लिए थोड़ी दुश्वारियों वाली भी है। शिक्षा के क्षेत्र में ही पारंपरिक क्लासेस बंद (regular classes closed) होने के बाद आॅनलाइन क्लासेस (online classes) बदलाव का वाहक बन रहे लेकिन इस शैक्षणिक यात्रा में डेटा की कमी आड़े आने लगी है। तमाम बच्चों के पास पर्सनल एंड्रायड फोन ही नहीं है। ऐसे में इस नई पद्धति से दी जा रही शिक्षा का प्रसार कैसे होगा इसे आसानी से समझा जा सकता है।
जानकार बताते हैं कि कोरोना काल में आॅनलाइन शिक्षा का जिस तरह चलन बढ़ा है उसके लिए पर्याप्त मात्रा में डेटा की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराना होगा(extra data issue)। यही नहीं हर एक के पास अपना एंड्रायड फोन या टैब या कंप्यूटर भी इस नई पद्धति के लिए महत्वपूर्ण व अनिवार्य है।
विशेषज्ञों की मानें तो एक आम व्यक्ति/छात्र/शिक्षक औसत एक से डेढ़ जीबी डेटा का प्लान लेता है। इसमें करीब पच्चीस प्रतिशत उसका अपडेट में ही कहीं न कहीं खर्च हो जाता है। दूसरा यह कि किसी भी विषय की आॅनलाइन क्लास कम से कम आधा घंटा की होगी। अगर इस तरह की पांच छह क्लासेस कोई छात्र एटेंड करे या मिले असाइनमेंट को डाउनलोड करे तो उसे डेढ़ जीबी डेटा से अधिक की आवश्यकता पड़ेगी। दूसरी यह कि नेटवर्क की वजह से तमाम बार स्पीड भी परेशानी का सबब न जाती है।
शिक्षकों का मानना है कि उन पर व छात्रों पर भी एक अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ता है। तमाम छात्र इस स्थिति में नहीं होते कि वह एक बेहतर एंड्रायड खरीद सके या अतिरिक्त डेटा खर्च वहन कर सके। ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र का यह बदलाव तमाम तक पहुंच तक नहीं पा रहा।

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