
ग्वालियर. त्योहार हो या शादी, सोने-चांदी के गहने खरीदते समय ग्राहक अपनी मेहनत की कमाई के बदले शुद्धता की गारंटी चाहता है। चमक देखकर गहना पसंद करना आसान है, लेकिन उसमें वास्तव में कितना सोना या चांदी है, इसका भरोसा पहचान चिह्न से ही मिलता है। सोने पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था लागू होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है, लेकिन चांदी के मामले में अभी भी कई सवाल बाकी हैं। मध्यप्रदेश में 6,741 पंजीकृत स्वर्ण विक्रेताओं के मुकाबले हॉलमार्किंग केंद्र 49 हैं, जबकि 859 पंजीकृत चांदी विक्रेताओं के लिए ऐसे केंद्रों की संख्या महज 10 है। ऐसे में सवाल है कि जब चांदी की हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी, तब हर गहने की शुद्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी तैयार होगी? मध्यप्रदेश में 50 हजार से अधिक सराफा कारोबारी हैं।
14 अक्टूबर को विश्व मानक दिवस के मौके पर सोने और चांदी की शुद्धता का मुद्दा ग्राहकों के लिए खास है। सोने की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की दिशा में लंबा सफर तय हुआ। वर्ष 2000 में हॉलमार्किंग की शुरुआत स्वैच्छिक रूप से हुई और जून 2021 में चुनिंदा चरणों में इसे अनिवार्य किया गया। अब चांदी की हॉलमार्किंग को लेकर तैयारियां जारी हैं। इससे ग्राहकों को शुद्धता की पहचान मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त जांच केंद्र, स्पष्ट मानक और जागरूकता भी जरूरी होगी।
हॉलमार्किंग केंद्र संचालक महेंद्र जैन बताते हैं कि पहले एक दिन में करीब 300 सोने के आभूषणों पर पहचान संख्या दर्ज कर लेते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 100 रह गई है। पहचान संख्या के साथ तस्वीर और अन्य जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होने से प्रक्रिया में अधिक समय लग रहा है। चांदी की हॉलमार्किंग शुरू होने पर काम का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में केंद्रों की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी होगा।
बीआइएस के डिप्टी डायरेक्टर हर्षित कुमार जैन के अनुसार, सोने पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद चांदी के लिए भी व्यवस्था लागू करने की तैयारियां जारी हैं। कई सराफा कारोबारी इसके लिए पंजीयन करा चुके हैं और हॉलमार्किंग केंद्र भी काम कर रहे हैं।
Updated on:
14 Oct 2026 05:46 pm
Published on:
14 Oct 2026 05:45 pm
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