
ग्वालियर। तस्करी करके ग्वालियर लाए गए विलुप्त प्रजाति के मीठे पानी के कछुए (इंडियन टैंट टर्टल) और गागरोनी तोता (एलेक्जेंड्रिया पैराकी) की बिक्री का भंडाफोड़ वन विभाग के अमले ने किया है। शिंदे की छावनी स्थित केजीएन पेट शॉप एवं एक अन्य दुकान पर हुई कार्रवाई में 10 तोते और 30 कछुए बरामद हुए।
शहर और आसपास के क्षेत्र में चाइनीज फैंगशुई के बढ़ते चलन के कारण बीते कुछ सालों से छोटे कछुओं की मांग लगातार बढ़ी है। लोगों में बढ़ रहे अंधविश्वास के कारण इसमें बढ़ोतरी हो रही है। स्थिति यह है कि हर दिन २० से ५० कछुए लोग खरीद कर ले जा रहे हैं। इसके साथ ही इंसान की भाषा सबसे जल्दी सीखने वाले गागरोनी या एलेक्जिेंड्रिया पैरोकी को भी लोग खरीदकर पिंजरों में बंद कर रहे हैं। इनकी बढ़ती बिक्री को लेकर किसी व्यक्ति ने सीधे वन विभाग के चीफ कंजरवेटर विक्रम सिंह को शिकायत की थी, इसके बाद टीम ने रैकी की। शिकायत सही मिली तो सोमवार को छापामार कार्रवाई करके पक्षी और कछुओं को दुकानों से बरामद किया है।
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प्रतिबंधित हैं कछुए , एक्वेरियम और पिंजरों में बंद रखने के लिए हो रही खरीद
कछुओं को तस्कर चंबल नदी से पकड़ कर लाते हैं। इनकी तीन कैटेगरी होती है। इसमें सबसे छोटे, इसके बाद मंझोले और फिर बड़े कछुए शामिल हैं। नदी के पानी को साफ करने वाली इस प्रजाति की खरीद फरोख्त को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण इन्हें नदियों से पकड़ा जा रहा है और बेचा जा रहा है। इनकी बिक्री 400 रुपए से लेकर 2 हजार रुपए प्रति कछुआ तक है। 70 फीसदी तोते मर जाते हैं गागरोनी तोते की तस्करी संभाग के श्योपुर जिले से सबसे ज्यादा हो रही है, इसके अलावा पंजाब और छत्तीसगढ़ से भी इनकी तस्करी की जा रही है। इन तोतों को घोंसलों से पकड़कर सीधे लाया जाता है। बेहतर देखभाल न होने के कारण तस्करी करके लाने के दौरान 100 में से 70 तोते मर जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि ग्वालियर में सबसे ज्यादा तोते श्योपुर से ही लाए जाते हैं।
तोते:
सबसे जल्दी इंसानी भाषा सीखने वाले गागरोनी तोते को लोग घरों में पालने के लिए खरीदते हैं। इन तोतों की बाजार में कीमत लगभग 1 हजार रुपए प्रति तोता है। तोतों की बिक्री करने वाले इनकी उम्र के हिसाब से शहर के लोगों को बेच रहे हैं।
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कछुए:
डेढ़ से दो इंच लंबाई वाले कछुए को एक्वेरियम में रखना लोग शुभ मानते हैं, इसलिए इनकी बिक्री सबसे ज्यादा है। इन कछुओं को दुकानदार उपलब्धता के हिसाब से 400 से 600 रुपए में बेचते हैं। कछुए को लाने के बाद सही दाना न मिलने के कारण एक्वेरियम में इनकी मौत अधिकतम तीन महीने में हो जाती है।
प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए और तोतों की बिक्री की सूचना के बाद कार्रवाई में शिंदे की छावनी स्थित दुकानों से 30 कछुए और 10 तोते बरामद किए। वन्य प्राणी अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।
विक्रम सिंह, चीफ कंजरर्वेटर
Published on:
13 Mar 2018 11:11 am
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