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मप्र में 5 साल में पावरलूम 5,047 के पार, लेकिन हाथ के बुनकर हाशिए पर

7 अगस्त यानी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस...यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस ताने-बाने को नमन करने का दिन है, जिसे चंदेरी, महेश्वर और बुरहानपुर के बुनकर अपने हाथों के जादू से गढ़ते हैं।
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7 अगस्त यानी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस...यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस ताने-बाने को नमन करने का दिन है, जिसे चंदेरी, महेश्वर और बुरहानपुर के बुनकर अपने हाथों के जादू से गढ़ते हैं।

7 अगस्त यानी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस...यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस ताने-बाने को नमन करने का दिन है, जिसे चंदेरी, महेश्वर और बुरहानपुर के बुनकर अपने हाथों के जादू से गढ़ते हैं।

  • राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (7 अगस्त) विशेष : 2021 में 4,649 पावरलूम थे, जो 2025-26 में बढक़र 5,047 हो गए
  • चंदेरी के 13 हजार और महेश्वर के 35 सौ से ज्यादा बुनकर आधुनिक बाजार और ई-कॉमर्स की पहुंच से दूर

ग्वालियर. 7 अगस्त यानी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस…यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस ताने-बाने को नमन करने का दिन है, जिसे चंदेरी, महेश्वर और बुरहानपुर के बुनकर अपने हाथों के जादू से गढ़ते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आज जब आधुनिकता की दौड़ में पावरलूम सरपट दौड़ रहे हैं, तब क्या हमारी इस पारंपरिक कला और हथकरघा बुनकरों की सुध लेने वाला कोई है? मध्यप्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वस्त्र उद्योग को गति देने के लिए पावरलूमों को लगातार बूस्टर मिल रहा है है। यही वजह है कि 2025-26 में प्रदेश में पावरलूम की संख्या 5,047 के पार जा चुकी है। पिछले पांच वर्षों में पावरलूम की यह सर्वाधिक संख्या है। लेकिन इस चमक के बीच एक बुनियादी सवाल खड़ा होता है-क्या राज्य की सांस्कृतिक पहचान सहेजने वाले पारंपरिक हथकरघा बुनकरों को भी तकनीकी, विपणन, ई-कॉमर्स की वैसी ही उड़ान मिलेगी?

चंदेरी-महेश्वर के ताने-बाने को चाहिए नया संबल
मध्यप्रदेश की पहचान चंदेरी, महेश्वर, ग्वालियर बारा सिवनी (बालाघाट), निवाड़ी के सूती-रेशमी धागों से पूरी दुनिया में है। पावरलूम जहां बड़े पैमाने पर उत्पादन और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का जरिया बने हैं, वहीं हथकरघा अपनी हस्तनिर्मित गुणवत्ता और सांस्कृतिक मूल्य के कारण बेमिसाल है। जानकारों का कहना है कि वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया की भावना तभी पूरी तरह चरितार्थ होगी, जब हथकरघा बुनकरों को केवल पारंपरिक कारीगर न मानकर, उन्हें डिजिटलाइजेशन और ब्रांडिंग वाले समान वित्तीय ढांचे से मजबूत किया जाएगा।

मप्र में साल दर साल ऐसे बढ़ रहे पावरलूम
वर्ष पावरलूम की संख्या
2021-22 4,649
2022-23 4,688
2023-24 4,673
2024-25 4,818
2025-26 5,047 (सर्वाधिक संख्या)
(स्रोत : एमएसएमई विभाग, मप्र शासन)

प्रदेश में कहां कितने बुनकर

  • चंदेरी 13,000
  • महेश्वर 3,540
  • ग्वालियर 160
  • बारा सिवनी (बालाघाट) 120
  • निवाड़ी 40

समान नीति बनाए जाने की जरूरत
मशीनों की तेज रफ्तार जरूरी है, लेकिन संस्कृति और रोजगार को सहेजने वाले हथकरघा बुनकरों की बदहाली दूर करना भी समय की मांग है। ऐसे में प्रदेश भर के बुनकरों के लिए भी तकनीकी, विपणन और ई-कॉमर्स की समान नीति बनाए जाने की आवश्यकता है। भारत की पारंपरिक बुनकर कला को जीवित रखने के लिए प्रदेश सरकार को छत्तीसगढ़ की तरह सभी विभागों में हथकरघा वस्त्रों की प्रदाय के लिए अनिवार्य भी किया जाना चाहिए।

  • डीसी तिवारी, पूर्व प्रबंधक, मप्र हस्त शिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम ग्वालियर