सिंधिया के इस शख्स ने छुड़ाए पसीने,कभी महाराज के साथ सेल्फी लेने के लिए रहता था बेताब,जानिए

सिंधिया के इस शख्स ने छुड़ाए पसीने,कभी महाराज के साथ सेल्फी लेने के लिए रहता था बेताब,जानिए

monu sahu | Publish: May, 24 2019 03:27:25 PM (IST) | Updated: May, 24 2019 03:29:32 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

जनता ने तोड़ा मिथक: आजादी के बाद पहली बार गुना सीट पर हारा सिंधिया परिवार

ग्वालियर। लोकसभा चुनाव 2019 में देश की 542 सीटों के नतीजे आ चुके हैं। जिसमें भाजपा ने देशभर में सुनामी लाते हुए प्रचंड जीत हासिल की है। वहीं मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी कांग्रेस को बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा है। 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी मध्यप्रदेश में मोदी का जलवा कायम रहा। इस बार प्रदेश में भाजपा ने 29 लोकसभा सीटों में से 28 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि 2014 में 27 सीटें भाजपा के हिस्से में गई थी और दो सीटें कांग्रेस के पास आई थी। इस बार मोदी लहर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से एक लाख से ज्यादा वोटों से हार गए।

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उनको हराने वाला और कोई नहीं भाजपा के कृष्ण पाल यादव है जो कभी कांग्रेस के ही नेता थे। उनको ज्योतिरादित्य सिंधिया की जीत के राजदार भी कहा जाता था। पिछले उपचुनाव में अपनी अनदेखी के बाद वो कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। बता दें कि एक समय ऐसा था जब कृष्ण पाल,ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सेल्फी लेने के लिए लाइन में रहते थे। ये बात सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने कृष्ण पाल को भाजपा उम्मीदवार बनाए जाने पर कही थी।

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45 साल के कृष्ण पाल यादव पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं। उनके पिता अशोकनगर में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे हैं। साथ ही केपी यादव ज्योतिरादित्य सिंधिया के नजदीकी रहे हैं। सिंधिया की चुनाव की तैयारियों को वह अच्छी तरह से देखते थे। मुंगावली विधानसभा के उपचुनाव में कृष्ण पाल विधानसभा टिकट के मुख्य उम्मीदवार थे। लेकिन ऐन वक्त पर उनका टिकट काट दिया गया। जिसके बाद वह नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए। बाद में अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में केपी यादव को भाजपा ने मुंगावली से अपना प्रत्याशी भी बनाया लेकिन वह हार गए।

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lok sabha election 2019

सिंधिया के पसीने छुड़ा दिए
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने जब भाजपा ने केपी यादव को उतारा तो यह कहा गया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया 23 मई को आसानी से जीत हासिल कर लेंगे। केपी को कमजोर प्रत्याशी के रुप में देखा जा रहा था। लेकिन कृष्ण पाल ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के पसीने छुड़ा दिए और शुरू से लेकर अंत तक सिंधिया को वह हराते ही चले गए।

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महाराज के साथ सेल्फी लेने की लाइन में रहते थे केपी
यहां बता दें कि जब भाजपा ने कृष्ण पाल सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया गया था तो ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने एक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी जिसमें उन्होंने कहा कि जो कभी महाराज के साथ सेल्फी लेने की लाइन में रहते थे,उन्हें भाजपा ने अपना प्रत्याशी चुना है।

 

यहां से ज्योतिरादित्य ने 4 बार जीता है चुनाव
बता दें कि गुना में सिंधिया परिवार का कब्जा रहा है। इस सीट से ज्योतिरादित्य की दादी विजयाराजे सिंधिया 6 बार,ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया 4 बार और ज्योतिरादित्य ने 4 बार चुनाव जीता है।


सिंधिया और केपी का था याराना
गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर 70 साल बाद सिंधिया परिवार को शिकस्त मिली है और जिसने इस परिवार के मुखिया यानि ’योतिरादित्य सिंधिया को हराया, वे केपी यादव, कभी सिंधिया के बहुत नजदीक हुआ करते थे। इस अप्रत्याशित परिणाम के बाद सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुआ, जिसमें सिंधिया किशोरावस्था में केपी यादव के गले में हाथ डालकर बैठे हैं। इस फोटो की पुष्टि केपी यादव की पत्नी ने करते हुए बताया कि यह इंदौर का फोटो है, तब केपी की उम्र 10 साल थी और वे कक्षा पांचवी में पढ़ते थे।

 

केपी को बधाई जनादेश स्वीकार : सिंधिया
सिंधिया ने ट्वीट करते हुए लिखा कि मैं जनादेश को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं। क्योंकि यह जनता का निर्णय है, जो मुझे स्वीकार है। मेरे लिए राजनीति जनसेवा करने का केवल एक माध्यम है और मैं सदेव जनसेवा के लिए प्रतिबद्ध रहूंगा। मैं संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं और कांगे्रेस के सभी कार्यकर्ताओं को दिल से धन्यवाद देता हूं। साथ ही मेरी ओर से डॉ. केपी यादव को जीत की बधाई।

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