
सीबीआइ ने व्यापमं कांड के सभी केसों की जांच कर न्यायालय में चालान पेश कर दिए हैं। पीएमटी और व्यापमं की परीक्षाओं से जुड़े 31 केसों में न्यायालय से फैसला हो चुका है, लेकिन सीबीआइ व्यापमं कांड में रैकेटियर और दलाल की भूमिका निभाने वालों के खिलाफ केस साबित नहीं कर पा रही है। यह वजह है कि 90 फीसदी केसों के रैकेटियर और दलाल दोषमुक्त हुए हैं।
न्यायालय से परीक्षार्थी और सॉल्वर को ही सजा हो रही है। व्यापमं कांड के आरोपियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं से रैकेटियर और दलाल के दोषमुक्त होने के कारण जाना तो, उनका कहना है कि रैकेटियर और दलाल के बीच हुए पैसे के लेनदेन के साक्ष्य सीबीआइ ने पेश नहीं किए हैं। इस कारण संदेह का लाभ मिल रहा है। व्यामपं कांड की जांच सबसे पहले एसआइटी ने की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2015 में व्यापमं कांड की जांच सीबीआइ के सुपुर्द हो गई। सीबीआइ ने पूरे मामले की अतिरिक्त जांच की और चालान पेश किए। जनवरी 2021 में चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल की सीटों पर फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपियों के खिलाफ आखिरी चालान पेश किया। अधिकतर केसों में रैकेटियर और दलाल दोष मुक्त हुए हैं।
ऐसे बनाई थी आरोपियों की चैन
- एसआइटी ने अपनी जांच में आरोपियों की चैन बनाई थी। रैकेटियर, दलाल, सॉल्वर, परीक्षार्थी व पिता को शामिल किया था, लेकिन सीबीआइ ने अतिरिक्त जांच में परीक्षार्थियों के पिता को क्लीन चिट दी। खाते से रुपयों का लेनदेन नहीं मिलने की से क्लीन चिट मिली। हर केस में पिता आरोपी था। पिता को राहत मिल गई।
- सीबीआइ ने रैकेटियर, दलाल, सॉल्वर व परीक्षार्थी की चैन जारी रखी और चालन पेश किए। रैकेटियर, दलाल की भूमिका फर्जीवाड़े में अहम थी। पैसे लेकर सॉल्वर की व्यवस्था करना दलाल व रैकेटियर का था।
- धारा-27 (अभिरक्षा में पूछताछ) के तहत दिए मेमो के आधार पर रैकेटियर व दलाल पर केस बनाया। केस के आरोपी ने नाम बताया और केस दर्ज कर लिया। दस्तावेजी साक्ष्य नहीं मिले। आरोपियों के अधिवक्ताओं ने दस्तावेज साक्ष्य नहीं होने पर बचाव की ढाल बनाया।
- पीएमटी कांड के आरोपियों के केस में एसआइटी ने मेडिकल कॉलेज के आसपास ठेले लगाने वालों को गवाह में शामिल किया था। सीबीआइ की जांच में ये शामिल रहे। ठेले वाले अपनी गवाही से पलट गए। इसका भी फायदा मिला।
इस केस से समझें दोषमुक्ति
- प्रियंका श्रीवास्तव को पीएमटी पास कराने के लिए शैलेंद्र निरंजन, उमेश बघेल और विशाल यादव की भूमिका बताई थी। शैलेंद्र निरंजन का अखिलेश रैनवाल ने धारा 27 के तहत बयान लिया था। शैलेंद्र निरंजन ने जो खुलासा किया था, उसकी पुष्टी के लिए दस्तावेजी और गवाह न्यायालय में नहीं था। इस कारण बयान संदिग्ध हो गया।
- यही स्थिति विशाल और उमेश बघेल की रही। धारा 27 के बयान को सीबीआइ साबित नहीं कर सकी।
इनका कहना है
व्यापमं कांड में अधिकतर खुलासा एसआइटी ने कर दिया था। सीबीआइ को रैकेटियर और दलाल के खिलाफ अतिरिक्त में दस्तावेज और मजबूत साक्ष्य पेश करने थे। रैकेटियर और दलाल को लेकर जो अभियोजन कहानी दी है, वह विचारण के दौरान संंदिग्ध हो रही है। इसका फायदा आरोपियों को मिला है।
- भारत सिंह कौरव, पूर्व शासकीय अधिवक्ता
Updated on:
28 Jan 2024 09:59 am
Published on:
28 Jan 2024 09:53 am
