
शिवपाल और अखिलेश का कैसे होगा राजनीतिक मिलन, जल्द हो सकता है कोई बड़ा उलटफेर!
लखनऊ. समाजवादी पार्टी में यादव परिवार की रार थमने का नाम नहीं ले रही है। जब भी ऐसा लगता है कि मुलायम परिवार में सब ठीक होने वाला है, तभी कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है जो इस घमासान को नई दिशा में मोड़ देता है। खुद मुलायम सिंह यादव और सपा के कई नेताओं की तमाम कोशिशों के बाद भी चाचा शिवपाल सिंह यादव की अपने भतीजे अखिलेश यादव से बात बन नहीं पा रही है। शिवपाल समाजवादी पार्टी में एक अच्छे और बड़े पद के साथ वापसी चाहते हैं तो भतीजे अखिलेश यादव उनकी मांग को कोई तवज्जो ही नहीं दे रहे। ऐसे में राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जल्द ही सपा में कोई बड़ा उलटफेर हो सकता है।
चाचा-भतीजे की जंग में सब हारे...
आपको बता दें कि आज से तकरीबन दो साल पहले शिवपाल और अखिलेश के बीच ऐसी वर्चस्व की जंग छिड़ी जो आज तक सपा को नुकसान पहुंचा रही है। उस समय अखिलेश ने शिवपाल को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया तो पिता मुलायम सिंह को भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटा दिया था। जिसके बाद से समाजवादी पार्टी में अंदरखाने चल रही पारिवारिक जंग सड़क पर आ गई। पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ताओं में दो फाड़ हो गई। पार्टी के कुछ नेताओं ने शिवपाल का समर्थन करते हुए जमीन पर सपा को नुकसान पहुंचाने का काम किया, तो कुछ अखिलेश यादव के साथ डटे रहे। इस बीच मुलायम ने भी शिवपाल और अखिलेश में सुलह की तमाम कोशिशें की लेकिन बता बन नहीं पाई।
कोशिशों का नहीं दिखा कोई असर
समाजवादी पार्टी में हाशिये पर जाने के बाद से अब तक शिवपाल अकेले ही हैं। शिवपाल ने पिछले महीने जुलाई में लखनऊ में हुई सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था। बैठक में मुलायम सिंह यादव भी नहीं पहुंचे थे। हालांकि उससे पहले शिवपाल ने राज्यसभा चुनाव में सपा का साथ देकर अखिलेश से सुलह की ओर इशारा किया लेकिन बात तब भी नहीं बनी। वहीं शिवपाल ने मुलायम के चचेरे भाई और अखिलेश के करीबी चाचा राम गोपाल यादव के साथ भी इस मुद्दे पर कई बार मुलाकातें कीं और भतीजे के करीब आने का संकेत दिया लेकिन अभी तक उसका भी कोई असर नहीं दिख सका।
दिल्ली की राजनीति में आजमाना चाहते हैं हाथ
जानकारों का ऐला मानना है कि शिवपाल इपने बेटे आदित्य के साथ दिल्ली की राजनीति में हाथ आजमाना चाहते हैं। इसके लिए ये दोनों 2019 के लोकसभा चुनाव में हाथ आजमाने का मन भी बना रहे हैं। लेकिन शिवपाल की इस मंशा को इस बार भी झटका लग सकता है, क्योंकि अखिलेश परिवारवाद के आरोपों से पार्टी को बाहर निकालकर अपनी इमेज ठीक करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने डिंपल तक को चुनाव लड़वाने से मना करके खुद कन्नौज से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। ऐसे में शिवपाल और आदित्य के सामने दिल्ली जाने का रास्ता मुश्किल ही दिख रहा है। आपको बता दें कि इस समय लोकसभा में सपा के 7 सांसद हैं और इसमें मुलायम सिंह यादव, भतीजे धर्मेंद्र, अक्षय, तेज प्रताप और बहू डिंपल यादव परिवार से ही हैं। जिसके चलते समाजवादी पार्टी हमेशा परिवारवाद के आरोपों से घिरी रहती है।
राजनीतिक भविष्य की तलाश में शिवपाल
दरअसल शिवपाल के बेटे आदित्य यादव फिलहाल स्टेट कॉरपोरेटिव फेडरेशन के चयरमैन हैं। लोकसभा चुनाव में अगर आदित्य को टिकट मिलता है तो ये शिवपाल की वापसी के लिए भी अच्छा हो सकता है। वैसे तो समाजवादी पार्टी में अपनी जगह को लेकर शिवपाल इन दिनों काफी चिंतित हैं और पिछले कई महीनों से वह लगातार इस मुद्दे पर लोगों से राय मशविरा भी कर रहे हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक शिवपाल सपा के बाहर भी अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं। इसके लिए वह धर्मनिरपेक्ष मोर्चा के साथ ही लोक दल के संपर्क में भी हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि बीते दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान भी शिवपाल ने कई मुद्दों पर बात की थी। हालांकि जानकारों को ये भी मानना है कि बीजेपी की राजनीतिक विचारधारा शिवपाल से काफी जुदा है। ऐसे में बीजेपी के साथ शिवपाल का रिश्ता भी बेमेल ही साबित हो सकता है।
Updated on:
29 Aug 2018, 11:48 AM IST
Published on:
24 Aug 2018, 11:25 AM IST
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