28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

15 साल पुरानी गाडिय़ां स्कूल बस में हो रही यूज, सीसीटीवी और स्पीडो मीटर भी नहीं

निजी स्कूलों की बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

हरदा

•

image

Subodh Sarswat

•

Updated: 31 Jul 2022, 1:42 PM IST

15 साल पुरानी गाडिय़ां स्कूल बस में हो रही यूज, सीसीटीवी और स्पीडो मीटर भी नहीं

15 साल पुरानी गाडिय़ां स्कूल बस में हो रही यूज, सीसीटीवी और स्पीडो मीटर भी नहीं

हरदा. जिले में संचालित निजी स्कूलों की बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। नियम विरुद्ध सड़कों पर दौड़ रहे ऑटो से बच्चों को स्कूल ले जाया जा रहा है। ऐसे वाहन बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्कूली बसों में सीसीटीवी, स्पीडो मीटर, प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं नदारद देखने को मिल रही हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को बसों में खतरों भरा सफर तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इधर, पिछले दिनों आरटीओ ने स्कूल संचालकों को स्पष्ट तौर पर कहा था कि न्यायालय की गाइडलाइन के तहत ही स्कूल वाहनों का संचालन करें। लेकिन जिला परिवहन के जांच अभियान में वाहनों के फिटनेस, दस्तावेज सहित अन्य कमियां सामने आ रही हैं।

बसों में ये सुविधाएं होना आवश्यक


- स्कूली वाहन में कोई म्यूजिक सिस्टम नहीं लगा होना चाहिए।

- वाहन चालक और सहायक का पुलिस वेरिफिकेशन होना अनिवार्य है।

- चालक कोई नशा नहीं करता हो, वाहन की क्षमता मिनी बस में 28 से 32 और बड़ी बस में ड्राइवर सहित 45 विद्यार्थियों को ले जाया सकता है।

- बसों पर स्कूल का नाम, टेलीफोन नंबर एवं ड्राइवर, कंडक्टर के नाम व मोबाइल नंबर लिखे होना चाहिए।

कई वाहनों को 15 साल हो गए

जानकारी के मुताबिक हरदा, खिरकिया और टिमरनी ब्लॉक में निजी स्कूलों का संचालन हो रहा है, जिनमें बसों सहित अन्य करीब 85 वाहनों से बच्चों को शहर और गांवों से स्कूल लाया जाता है। कई वाहनों को 15 साल हो गए हैं, लेकिन फिर भी उनका संचालन हो रहा है। साथ ही इनमें उच्च न्यायालय के मापदंड अनुसार सुविधाएं नहीं की गई हैं।

बिना दस्तावेज दौड़ रहे

चार महीने पहले आरटीओ ने कई ऑटो रिक्शा पर कार्रवाई की थी, जिसमें उनके पास दस्तावेज नहीं मिले थे। इनके लिए आरटीओ ने कृषि उपज मंडी में शिविर लगाकर कागजात बनाकर दिए थे।लेकिन इसके बावजूद कई ऑटो रिक्शा चालकों के पास कागजात नहीं है और वे स्कूली बच्चों को ढो रहे हैं। एक ऑटो में करीब 14 बच्चों को बैठाया जा रहा है। गत दिवस जांच में पकड़ाए दो ऑटो में इस तरह का नजारा देखने को मिला था।

यह भी पढ़ें : एमपी के कांग्रेस नेता ने द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र - राष्ट्रपति शब्द पर की उठाई ये मांग

बच्चों की सुरक्षा को लेकर बसों की निरंतर जांच की जा रही है। मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। क्षमता से अधिक बच्चे लेकर जाने वाले ऑटों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।

-मनोज तेनगुरिया, जिला परिवहन अधिकारी, हरदा