हरदा. सावन का दूसरा सोमवार बीत गया। रोजाना बादल छा रहे, लेकिन पानी नहीं बरश रहा। ग्यारह साल में अब तक यह सबसे कम बारिश का रिकार्ड है। गर्मियों की तरह लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। अब भी प्रतिदिन 160 टैंकर पेयजल की सप्लाई करना पड़ रही है। वजह है, अब तक हुई बारिश से भूजल का नहीं बढऩा। एक भी जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए। फसलों पर भी प्रतिकूल असर पडऩे लगा। फलस्वरूप पानी के लिए लोग टोटकों से लेकर पूजा-पाठ और भगवान शिव को मनाने के जतन में लग गए हैं।
जिले में शुरूआत में तेज बारिश के बाद बादल ऐसे रूठे कि दोबारा बरसे ही नहीं। इसके चलते जलस्रोतों में जान नहीं लौट पाई। जिससे गर्मी के दौरान व्याप्त पेयजल संकट दूर नहीं हो सका। नपा को गर्मी की तरह ही पानी की स्पलाई करना पड़ रही है। बारिश नहीं होने से एक ओर जहां गर्मी और उमस से लोग बेहाल हैं, वहीं उन्हें पेयजल के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जो थोड़े-बहुत रिचार्ज हो गए थे वे जलस्रोत दोबारा दम तोडऩे लगे हैं। सूखे की आशंका ने खासकर किसान वर्ग को चितिंत कर दिया है। सिंचाई शुरू हुई तो बिगड़ेंगे हालात
बारिश के बीते 11 साल के आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार अब तक सबसे कम बरसात हुई है। खरीफ फसलों पर खतरा बढऩे लगा है। हालात यह हैं कि फसलों की जहां स्प्रिंकिलर से सिंचाई करने की नौबत आ गई है। खेतों में सिंचाई का काम तेजी से बढ़ा तो आसपास के पेयजल स्रोतों पर इसका असर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों का जलस्तर नींचे जाने से रिहायशी क्षेत्रों में पानी की किल्लत खड़ी हो सकती है।