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पिछले साल लगाए थे लाखों पौधे, इस वर्ष पौधारोपण करना भूला शासन

अभी तक पौधारोपण को लेकर कोई कार्य योजना नहीं
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हरदा

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Sandeep Nayak

•

Updated: 10 Jul 2018, 1:44 PM IST

Planting not ruling this year

पिछले साल लगाए थे लाखों पौधे, इस वर्ष पौधारोपण करना भूला शासन

खिरकिया. गत वर्ष शासन द्वारा प्रदेश में एक साथ करोड़ों पौधों का रोपण कर गिनीज वल्र्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने की पहल की गई थी। लेकिन इस वर्ष शासन के हाथ पौधारोपण के लिए आगे नहीं आ रहे है। पर्यावरण को संतुलित किए जाने के लिए पेड़ों का होना बहुत ही जरूरी है। ऐसे में शासन द्वारा पौधारोपण को बढ़ावा देने के लिए कई अभियान चलाए जाते है, लेकिन इस वर्ष पौधारोपण को लेकर कोई कार्य योजना बनती नहीं दिख रही है। पौधारोपण के लिए समय बीतता जा रहा है, लेकिन इसको लेकर शासन की ओर से कोई कार्यक्रम तय नहीं है।
पौधारोपण करने नहीं मिल रहे पौधे -
समाजसेवी, सामाजिक संगठन व नागरिक अपने स्तर पर पौधारोपण करना चाहते है। लेकिन इसके लिए उन्हें पौधे नहीं मिल रहेे है। शासन द्वारा पौधारोपण कार्यक्रम के तहत नागरिकों को नि:शुल्क या न्यूनतम शुल्क पर पौधे उपलब्ध कराए जाते है। लेकिन इस साल पौधारोपण करना तो दूर नागरिकों को पौधे भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे है। वन विभाग के माध्यम से यह पौधे उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन वर्तमान में वन विभाग के पास ही पौधे नहीं है। निजी नर्सरी से नागरिकों को पौधे लेना बहुत ही महंगा पड़ रहा है। ऐसे में वे पौधारोपण करने का विचार भी त्याग देते है। हालांकि इस वर्ष कुछ सामजिक संस्थाओं व नागरिकों द्वारा पौधारोपण किया गया है। लेकिन पर्यावरण को बचाना है तो प्रतिवर्ष हजारों व लाखों पौधों का रोपण किए जाने की आवश्यकता है।

गत वर्ष रोपे थे साढ़े 4 लाख से अधिक पौधे -
शासन के कार्यक्रम के तहत विकासखंड में मनरेगा, नंदनवल फलोद्यान, कृषकों की मेढ़ पर जनपद, वन विभाग और उद्यानिकी विभाग के माध्यम से गत वर्ष 2 जुलाई को समूचे प्रदेश में एक साथ करोड़ों पौधों का रोपण किया गया था। जिसमें विकासखंड में साढ़े 4 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया था। जिसके लिए विधिवत कार्यक्रम भी तय किया गया था। शासकीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, वहीं पौधों के संरक्षण के लिए पौध रक्षक भी तैनात किए गए थे। जिसमें गांवों में नीम, सागौन, करंज, बांस, चिलुर सहित अन्य छायादार व फलदार पौधों का रोपण किया गया था। गत वर्ष के शासकीय आंकड़े के अनुसार विकासखंड में कुल 4 लाख 6 4 हजार 8 45 पौधों का रोपण किए जाने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें जनपद पंचायत द्वारा तीन वर्ग में मनरेगा के तहत सार्वजनिक स्थानों पर 8 9 हजार 932, खेतों में नंदनफल उद्यान के तहत 3400, किसानों के खेतों की मेढ़ों पर 6 8 हजार 8 00 पौधों का रोपण किया गया था। वहीं वन विभाग द्वारा 2 लाख 78 हजार, उद्यानिकी विभाग द्वारा 24 हजार 6 45 पौधों का रोपण किया गया था। लेकिन इस वर्ष कहां कितने पौधे कब रोपे जाएंगे, इसको लेकर कोई तैयारी नहीं दिखाई दे रही है।

देखरेख व रखरखाव के अभाव में नष्ट हुए पौधे-
प्रशासन द्वारा पिछले वर्ष रोपे पौधों में कई पौधे देखभाल एवं रखरखाव के अभाव में नष्ट हो चुके है। इन नष्ट हुए पौधे के स्थान पर दूसरे पौधे भी नहीं गए। किसानों के खेतों की मेढ़ों एवं सड़क के किनारे लगाए गए पौधों में से भी कई पौधे नरवाई की आग में झूलस कर नष्ट हो गए है। लोगों का कहना है पहले पिछले वर्ष रोपे गए पौधे में से नष्ट हुए पौधे के स्थान पर पौधारोपण कर उनकी समुचित देखभाल किया जाना चाहिए। जिससे की वे फल फूल सके।

इनका कहना है-
पौधारोपण के लिए शासन से अभी तक पौधे एवं किसी भी प्रकार के निर्देश नहीं मिले है। शासन से निर्देश मिलने पर पौधारोपण की कार्यवाही की जाएगी।
बीआर भार्गव, उपवनपाल, वन विभाग, खिरकिया