
परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप (फोटो सोर्स : Whatsapp Group)
Hardoi Accident: हरदोई जिले में गुरुवार देर रात एक बेहद दर्दनाक और रहस्यमयी घटना सामने आई, जिसने स्थानीय लोगों के साथ ही मृतक के परिजनों को झकझोर कर रख दिया। लखनऊ-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर बघौली यार्ड के पास एक 17 वर्षीय किशोर लक्ष्य मिश्रा, जो गैर-इरादतन हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी था, का क्षत-विक्षत शव मिला। चेहरे की स्थिति पहचान योग्य नहीं थी, ऐसे में उसके हाथ पर बने टैटू के आधार पर परिजनों ने पहचान की। पुलिस का प्रारंभिक दावा है कि किशोर ने नई दिल्ली-लखनऊ सुपरफास्ट एक्सप्रेस के आगे कूदकर खुदकुशी की, लेकिन परिवार का आरोप है कि पूरी घटना पुलिस की गंभीर लापरवाही का परिणाम है।
शुक्रवार सुबह मोर्चरी में मृतक की मां एवं परिजनों ने जबरदस्त हंगामा किया और कुछ देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। बाद में सीओ सिटी के आश्वासन पर वे शांत हुए। इस घटना ने पुलिस कार्रवाई, किशोर की गिरफ्तारी और उसकी मानसिक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
लक्ष्य मिश्रा शहर की शुगर मिल कॉलोनी का रहने वाला और कक्षा 11 का छात्र था। 5 नवंबर को उसका शहर के लखनऊ रोड स्थित जियो पेट्रोल पंप पर ऑनलाइन पेमेंट को लेकर विवाद हुआ था। पंप कर्मी शिव ओम सिंह ने लक्ष्य, उसके पिता पवन मिश्रा और दो अन्य दोस्तों के खिलाफ जानलेवा हमले की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपों के अनुसार विवाद बढ़ने पर मारपीट हुई और घटना गंभीर रूप ले गई। पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए लक्ष्य के पिता पवन मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पवन मिश्रा पहले पुलिस विभाग में सिपाही थे, जिन्हें कुछ वर्ष पूर्व बर्खास्त कर दिया गया था।
लक्ष्य को पुलिस पकड़कर ले गई थी, वहीं से उसकी मानसिक हालत बिगड़ी। लक्ष्य की मां दीपमाला का बड़ा दावा है कि बुधवार देर रात पुलिस ने उनके बेटे को भी उठा लिया था। उनका कहना है कि पुलिस देर रात लक्ष्य को पकड़ ले गई थी। सुबह वह किसी तरह कोतवाली से भागकर घर पहुंचा। वह बेहद डरा हुआ था और उसकी हालत ठीक नहीं थी। दीपमाला का आरोप है कि पुलिस द्वारा की गई पिटाई से वह मानसिक रूप से टूट चुका था। घर आने के बाद भी उसकी स्थिति सामान्य नहीं हुई। भय और तनाव की वजह से वह घर से भाग गया था।
दीपमाला ने बताया कि घर लौटने के बाद लक्ष्य ने गुस्से में उनकी भी पिटाई की। इस पर उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर कॉल किया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन किशोर भाग गया था। परिजन इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि यदि पुलिस ने समय रहते उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया होता, तो शायद आज वह जिंदा होता।
घटना की आधिकारिक जानकारी तब सामने आई जब गुरुवार देर रात लगभग 12:30 बजे नई दिल्ली-लखनऊ सुपरफ़ास्ट एक्सप्रेस के पायलट विमल जॉनसन ने बघौली स्टेशन अधीक्षक को ‘रनओवर’ की सूचना दी। रन ओवर का मतलब हैं ट्रेन की चपेट में किसी व्यक्ति का आना और मौके पर मौत हो जाना। स्टेशन अधीक्षक ने तुरंत जीआरपी और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके से क्षत-विक्षत शव को उठाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना की जानकारी तब परिजनों तक पहुंची जब लक्ष्य के बघौली निवासी एक दोस्त ने मृतक के हाथ में बने टैटू को देखकर पहचान की। उसने तुरंत परिवार को जानकारी दी।
मोर्चरी कक्ष में परिजनों ने जोरदार हंगामा किया। उनका कहना था कि पुलिस की लापरवाही और डराने-धमकाने की वजह से ही उनके बेटे ने आत्मघाती कदम उठाया। कुछ देर तक स्थिति तनावपूर्ण रही। भीड़ बढ़ती जा रही थी, ऐसे में अधिकारी मौके पर पहुंचे।
सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने परिजनों से बात की और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद परिजन शांत हुए और पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू हुई।
पुलिस का कहना है कि की गई प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का लगता है। उनके अनुसार लक्ष्य ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी है। किसी प्रकार की मारपीट या हत्या के प्रमाण अभी नहीं मिले हैं। पुलिस के मुताबिक वह अपनी गिरफ्तारी और पिता की जेल भेजे जाने से मानसिक रूप से तनाव में था।
17 वर्षीय छात्र की मौत से पूरा क्षेत्र स्तब्ध है। लोगों का कहना है कि लक्ष्य थोड़ा गुस्सैल था, पर इतना कदम कैसे उठा सकता है? पड़ोसी उसके स्वभाव को सामान्य बताते हैं और पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं।
सीओ सिटी की ओर से मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। यदि पुलिसकर्मियों की लापरवाही साबित होती है तो कार्रवाई हो सकती है। दूसरी तरफ पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है और उसके पीछे मानसिक तनाव को प्रमुख कारण बता रही है।
Published on:
07 Nov 2025 10:57 pm
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