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बच्चे को अचानक कमजोरी, चलने में दिक्कत या धुंधला दिखने लगे? यह ADEM हो सकता है, NIH से जानिए इसके लक्षण

ADEM in Children: बच्चे को अचानक कमजोरी, चलने में दिक्कत, धुंधला दिखना या व्यवहार में बदलाव? NIH, Cleveland Clinic और Boston Children's Hospital के अनुसार जानिए ADEM के लक्षण, कारण और इलाज।
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भारत

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Dimple Yadav

Jun 26, 2026

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अचानक कमजोरी, चलने में दिक्कत या धुंधला दिखना हो सकता है ADEM- (photo- freepik)

ADEM Symptoms: अगर आपका बच्चा कुछ दिन पहले तक बिल्कुल स्वस्थ था, लेकिन अचानक उसे चलने में लड़खड़ाहट होने लगे, हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस हो, धुंधला दिखने लगे या उसका व्यवहार अचानक बदल जाए, तो इसे सिर्फ थकान या सामान्य वायरल संक्रमण का असर समझकर नजरअंदाज न करें। हालांकि ऐसे लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये ADEM (एक्यूट डिसैमिनेटेड एन्सेफेलोमाइलाइटिस) नाम की एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH), Cleveland Clinic और Boston Children's Hospital के अनुसार, ADEM एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की नसों को ढकने वाली सुरक्षात्मक परत (मायलिन) पर हमला कर देती है। इससे मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेशों का आदान-प्रदान प्रभावित हो सकता है।

ADEM क्या है?

ADEM का पूरा नाम एक्यूट डिसैमिनेटेड एन्सेफेलोमाइलाइटिस है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में अचानक होने वाली सूजन (Inflammation) से जुड़ी बीमारी है। NIH के अनुसार, यह समस्या अधिकतर बच्चों में देखी जाती है और अक्सर किसी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कुछ दिनों या हफ्तों बाद विकसित हो सकती है। बहुत कम मामलों में यह टीकाकरण के बाद भी हो सकती है, लेकिन ऐसा दुर्लभ होता है।

ADEM के शुरुआती लक्षण

  1. अचानक कमजोरी- बच्चे के हाथ, पैर या शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी महसूस हो सकती है।
  2. चलने में दिक्कत- बच्चा संतुलन खो सकता है, लड़खड़ा सकता है या सामान्य तरीके से चलने में परेशानी महसूस कर सकता है।
  3. धुंधला या कम दिखाई देना- यदि ऑप्टिक नस प्रभावित हो, तो एक या दोनों आंखों से धुंधला दिख सकता है।
  4. तेज बुखार और सिरदर्द- कई बच्चों में शुरुआत बुखार, तेज सिरदर्द और थकान से हो सकती है।
  5. उल्टी और अत्यधिक नींद आना- कुछ मामलों में बच्चा बहुत सुस्त दिखाई देता है, बार-बार सोता है या उल्टी की शिकायत हो सकती है।
  6. व्यवहार में बदलाव- बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो सकता है, भ्रम की स्थिति में रह सकता है या सामान्य बातचीत में कठिनाई महसूस कर सकता है।
  7. दौरे (Seizures)- गंभीर मामलों में कुछ बच्चों को दौरे भी पड़ सकते हैं।

ADEM क्यों होता है?

Cleveland Clinic के अनुसार, ADEM का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। माना जाता है कि संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मायलिन पर हमला कर देती है। यह बीमारी अक्सर वायरल संक्रमण और कुछ बैक्टीरियल संक्रमण साथ ही बहुत दुर्लभ मामलों में टीकाकरण के बाद देखी जा सकती है।

ADEM और मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) में क्या अंतर है?

NIH के अनुसार, ADEM और Multiple Sclerosis (MS) दोनों में मायलिन प्रभावित होती है, लेकिन दोनों अलग बीमारियां हैं।ADEM आमतौर पर एक बार होने वाली बीमारी होती है। यह बच्चों में अधिक देखी जाती है। इसमें बुखार और मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण अधिक सामान्य होते हैं। जबकि MS में बीमारी बार-बार लौट सकती है।

ADEM की पहचान कैसे होती है?

डॉक्टर बच्चे के लक्षणों और न्यूरोलॉजिकल जांच के आधार पर कुछ परीक्षण करा सकते हैं, जैसे:

  • एमआरआई (MRI)
  • रक्त जांच
  • रीढ़ की हड्डी के तरल (CSF) की जांच
  • अन्य न्यूरोलॉजिकल परीक्षण

इलाज कैसे किया जाता है?

Boston Children's Hospital के अनुसार, ADEM का इलाज मुख्य रूप से मस्तिष्क की सूजन कम करने पर केंद्रित होता है।इलाज में स्टेरॉयड दवाएं, इंट्रावेनस इम्युनोग्लोब्युलिन (IVIG), कुछ गंभीर मामलों में प्लाज्मा एक्सचेंज शामिल हो सकते हैं। इलाज हमेशा न्यूरोलॉजिस्ट की निगरानी में किया जाता है।

क्या ADEM से पूरी तरह ठीक हुआ जा सकता है?

अधिकांश बच्चों में समय पर इलाज मिलने पर अच्छी रिकवरी की संभावना होती है। हालांकि कुछ बच्चों में कमजोरी, ध्यान लगाने में कठिनाई या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं कुछ समय तक बनी रह सकती हैं। इसलिए नियमित फॉलो-अप जरूरी होता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

यदि बच्चे में अचानक चलने में दिक्कत हो, हाथ-पैरों में कमजोरी आ जाए, धुंधला दिखने लगे, बार-बार उल्टी हो, भ्रम, अत्यधिक सुस्ती या दौरे पड़ें, तो तुरंत अस्पताल या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।