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Ambulance New Rule 2026 : एंबुलेंस वालों की मनमानी नहीं चलेगी! 20 सेकेंड में उठेगी कॉल और 20 मिनट में पहुंचेगी

Ambulance will reach in 20 minutes : एंबुलेंस की देरी से मौत की घटनाएं आए दिन आती रही हैं। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा (NAS), 2026 के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके मुताबिक अब एंबुलेंस 20 मिनट में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
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नई दिल्ली

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Ravi Gupta

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Updated: 30 Jun 2026, 1:20 PM IST

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स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और एंबुलेंस की फाइल फोटो | Credit- Patrika

Ambulance New Rule 2026 In India :"एंबुलेंस के देरी से पहुंचने पर मरीज की मौत…, मरीज को खाट या ऑटोरिक्शा पर लेकर अस्पताल पहुंचे", इस तरह की खबरें आए दिन पढ़ने को मिलती हैं। इसलिए, सरकार ने इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आरोग्य सेतु 2.0 लॉन्च करने के साथ ही देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा (NAS), 2026 के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं।

अब एंबुलेंस सेवा सही समय पर मदद के लिए पहुंचेगी। आइए, राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा की नई गाइडलाइन की मुख्य बातों को विस्तार से समझते हैं।

देश में पहली बार ऐसा किया जा रहा है

पीआईबी (PIB) के मुताबिक, "ये दिशानिर्देश पहली बार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एम्बुलेंस सेवाओं की योजना बनाने, संचालन करने और निगरानी करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं, जिसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के लिए समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आपातकालीन चिकित्सा परिवहन सुनिश्चित करना है।"

एम्बुलेंस सेवा (NAS) के परिचालन दिशानिर्देश जानिए

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर लिखा, "एम्बुलेंस सेवा (NAS) परिचालन दिशानिर्देश, 2026 देशभर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य हर नागरिक तक समय पर गुणवत्तापूर्ण जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।"

उन्होंने इसके बारे में निम्नलिखित बिंदु साझा किए हैं, जिन्हें आम लोगों को जानना चाहिए:

  • एम्बुलेंस को औसतन 20 मिनट में घटनास्थल तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • कंट्रोल रूम में डॉक्टरों द्वारा तत्काल चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।
  • प्रत्येक एम्बुलेंस में प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
  • जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।
  • समयबद्ध कॉल रिस्पॉन्स और बेहतर आपातकालीन सेवा प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।
  • पूरे देश में मानकीकृत और गुणवत्तापूर्ण एम्बुलेंस सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।

एंबुलेंस कॉल सेंटर के लिए भी नियम

नई गाइडलाइन में यह भी बताया गया है कि एम्बुलेंस हेल्पलाइन पर कॉल आने पर 20 सेकेंड के भीतर 95 प्रतिशत कॉल उठाई जानी चाहिए। अगर कोई कॉल नहीं उठ पाती है या ड्रॉप हो जाती है, तो सेंटर ऐसी हर कॉल को फिर से कनेक्ट करेगा, ताकि मरीज को समय पर आपातकालीन मेडिकल सेवा मिल सके।

प्राइवेट एंबुलेंस सेवा के लिए नियम

प्राइवेट एंबुलेंस के लिए भी यही नियम लागू होंगे। अगर वे इन नियमों पर खरे उतरते हैं, तो ही उन्हें इस सेवा से जोड़ा जाएगा। प्राइवेट एंबुलेंस सेवा के लिए हर जिले में एक कमेटी गठित होगी, जो इन्हें जोड़ने के साथ-साथ इन पर निगरानी रखने का काम भी करेगी।

यह भारत के लिए क्यों जरूरी है?

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) का एक सामान्य अनुमान है कि मेडिकल इमरजेंसी से जुड़ी 90 प्रतिशत मौतों को समय पर इलाज देकर रोका जा सकता है। भारत के संदर्भ में, मेडिकल जर्नल्स और सरकारी आंकड़े यह साबित करते हैं कि अगर इमरजेंसी रिस्पांस टाइम (एंबुलेंस सेवा) को सुधारा जाए, तो हर साल सड़क दुर्घटनाओं और हार्ट अटैक या स्ट्रोक से होने वाली करीब 50 प्रतिशत मौतों (लाखों जानें) को रोका जा सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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