
कैंसर मरीज- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Anxiety Affects Body: अक्सर हमें लगता है कि ज्यादा टेंशन लेने का असर सिर्फ दिमाग पर पड़ता है, लेकिन सच ये है कि एंग्जायटी यानी हर समय चिंता में रहना पूरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। कैंसर एक्सपर्ट डॉ. तरंग कृष्णा का कहना है कि अगर कोई इंसान लंबे समय तक टेंशन में रहता है, तो इसका असर शरीर पर कैंसर के रूप में दिखने लगता है। यहां तक कि कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। आइए समझते हैं कैसे?
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एंग्जायटी, डर या मानसिक तनाव से घिरा रहता है, तो उसका शरीर लगातार फाइट या फ्लाइट मोड में रहता है। डॉ. तरंग कृष्णा के अनुसार, यह स्थिति शरीर में एक डोमिनो इफेक्ट (एक के बाद एक नुकसान होने का सिलसिला) शुरू कर देती है। लगातार रहने वाला तनाव सबसे पहले शरीर के सबसे कमजोर हिस्सों पर हमला करता है। लगातार घबराहट या चिड़चिड़ापन होने से शरीर की कोशिकाएं (सेल्स) इरिटेट होने लगती हैं।
यही क्रोनिक इरिटेशन आगे चलकर अंगों के अंदरूनी ढांचे को प्रभावित करती है और जब शरीर का डिफेंस सिस्टम पूरी तरह टूट जाता है, तब कैंसर जैसी घातक बीमारियों को पनपने का मौका मिलता है।
American Psychological Association के अनुसार, तनाव का हमारे शरीर के इन अंगों पर भी बुरा असर पड़ता है,
जब आप हर छोटी-बड़ी बात की चिंता करते रहते हैं, तो शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन बढ़ जाते हैं। शुरुआत में तो ये शरीर को संभालने में मदद करते हैं, लेकिन अगर लंबे समय तक ऐसा चलता रहे तो नुकसान शुरू हो जाता है।
इससे शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर पड़ने लगती है। यानी शरीर जल्दी बीमार पड़ सकता है और अंदर ही अंदर सूजन भी बढ़ने लगती है। ऐसे में शरीर के लिए बड़ी बीमारियों से लड़ना मुश्किल हो सकता है।
आपने कभी ध्यान दिया होगा कि ज्यादा घबराहट में दिल तेज धड़कने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि टेंशन का सीधा असर दिल पर पड़ता है। बार-बार ऐसा होने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल पर दबाव पड़ने लगता है। अगर लंबे समय तक एंग्जायटी बनी रहे, तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल की दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
ज्यादा टेंशन में कई लोगों का पेट खराब हो जाता है। किसी को गैस बनती है, किसी को पेट दर्द होने लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दिमाग और पेट का आपस में सीधा कनेक्शन होता है। एंग्जायटी की वजह से पेट में ज्यादा एसिड बनने लगता है, जिससे गैस, बदहजमी, पेट दर्द और अल्सर जैसी दिक्कत हो सकती है। आगे चलकर IBS जैसी बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
16 May 2026 04:29 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
