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Gum Disease: ब्रश करते समय मसूड़ों से आता है खून?एक अरब लोग इस समस्या से हैं परेशान

Gum Disease Treatment: WHO पीआरएसईएएच (PRSEAH) की डायरेक्टर का कहना है कि इसको मामूली नहीं समझना चाहिए। आइए जानते हैं कि मसूड़ों से खून आने की वजह और इससे बचने के उपाय।

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भारत

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Nidhi Yadav

Jun 03, 2026

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मसूड़ों की बीमारी का इलाज- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Gum Disease Treatment: कई बार जब हम सुबह ब्रश करते हैं, तो हमारे मसूड़ों से खून निकलने लगता है। ज्यादातर लोग इसे आम बात मान कर छोड़ देते हैं। उन्हें लगता है कि यह अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन, डॉ. गया गामहेवेगे, डब्ल्यूएचओ (WHO) पीआरएसईएएच (PRSEAH) की डायरेक्टर ने एक वीडियो शेयर करते हुए जानकारी दी है कि मामूली समझी जाने वाली इस बीमारी ने दुनिया भर में एक अरब लोगों को शिकार बना रखा है।

हमारे मुंह और दांतों की सफाई सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शरीर की सेहत से जुड़ी हुई है। एक रिसर्च का हवाला देते हुए डॉक्टर ने कहा है कि यह डायबिटीज और दिल की सेहत से भी जुड़ा हो सकता है। आइए जानते हैं कि मसूड़ों से खून किस कारण से आता है और इससे बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

मसूड़ों से खून आने के मुख्य कारण क्या हैं?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, मसूड़ों से खून आने की सबसे बड़ी वजह दांतों की ठीक से सफाई न होना है। जब हम मुंह साफ नहीं रखते, तो दांतों पर बैक्टीरिया की एक गंदी परत (Plaque) जम जाती है, जिससे मसूड़ों में सूजन आ जाती है। इसके अलावा कुछ और भी कारण हैं;

  • हार्ड ब्रिसल्स वाले ब्रश करना।
  • शरीर में विटामिन C या विटामिन K की कमी होना।
  • गलत तरीके से नकली दांत (Dentures) लगाना।
  • प्रेग्नेंसी या पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव।
  • खून पतला करने वाली दवाओं का सेवन करना।

मसूड़ों से खून आने की समस्या से कैसे बचें?

  • सॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करें।
  • दिन में कम से कम एक बार दांतों के बीच फंसे खाने को निकालें।
  • एंटीसेप्टिक माउथवॉश से कुल्ला करें।
  • डाइट में हरी सब्जियां और खट्टे फल शामिल करें।
  • साल में कम से कम दो बार दांतों का रूटीन चेकअप करवाएं।
  • दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।