
काम टालकर फोन देखते हुई युवती- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Psychology of Procrastination: हममें से ज्यादातर लोग कभी न कभी जरूरी कामों को छोड़कर फोन स्क्रॉल करने लगते हैं या कोई दूसरा गैर-जरूरी काम करने बैठ जाते हैं। मनोचिकित्सक इसे प्रोक्रेस्टिनेशन कहते हैं। साइंसडायरेक्ट में प्रकाशित मनोवैज्ञानिक डॉ. टिमोथी पिचल और उनकी टीम की रिसर्च बताती है कि काम टालने की यह आदत आपके समय की कमी नहीं, बल्कि आपकी इमोशनल हेल्थ से जुड़ी समस्या है। आइए जानते हैं कि हम ऐसा क्यों करते है और इसका स्वास्थ पर क्या असर पड़ता है?
जब हम किसी काम को टालते हैं, तो हमारा दिमाग उस काम से जुड़े तनाव, असफलता से बच रहा होता है। यह हमारे दिमाग की एक शॉर्ट-टर्म डिफेंस मैकेनिज्म है। हमारा मस्तिष्क दो हिस्सों में बंटा होता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, लिम्बिक सिस्टम (Limbic System) दिमाग का यह हिस्सा बहुत पुराना और स्वचालित है। यह हमेशा तुरंत मिलने वाली खुशी या राहत ढूंढता है। प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex) दिमाग का वो समझदार हिस्सा है जो प्लानिंग और लंबे समय के फायदों को देखता है।
जब कोई काम मुश्किल लगता है, तो लिम्बिक सिस्टम जीत जाता है। वह आपको उस तनाव से बचाने के लिए काम छोड़ देने की सलाह देता है, जिससे आपको कुछ समय के लिए राहत मिलती है। लेकिन बाद में यही आदत एंग्जायटी का कारण बन सकती है।
डॉक्टर आरती मिधा (MD, Psychiatrist) के अनुसार, लगातार काम टालने की आदत केवल आपकी प्रोडक्टिविटी ही खराब नहीं करती, बल्कि यह आपके शरीर और मन को बीमार बनाती है। आखिरी समय पर काम पूरा करने की जल्दी शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बढ़ा देती है। रात भर जागकर काम पूरा करने से इंसोमनिया और थकान की समस्या होती है। लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहने से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता घटने लगती है।
इससे निपटने के लिए लोग खुद को कोसते हैं या खुद पर गुस्सा करते हैं। लेकिन रिसर्च के अनुसार, प्रोक्रेस्टिनेशन को रोकने का इलाज है, आत्म-क्षमा (Self-Forgiveness)। स्टडी में पाया गया कि जिन छात्रों ने पिछली बार परीक्षा की तैयारी टालने के लिए खुद को पूरी तरह माफ कर दिया, उन्होंने अगली परीक्षा में बहुत कम प्रोक्रेस्टिनेशन किया। जब आप खुद को माफ कर देते हैं, तो काम के साथ जुड़ा पुराना तनाव और अपराधबोध खत्म हो जाता है, जिससे आपका दिमाग अगली बार बिना डरे काम शुरू कर पाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
04 Jun 2026 10:51 am
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