
पेट दर्द से परेशान युवती- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Stress and Gut Health: क्या आपको पता है कि जब आप बहुत ज्यादा तनाव में होते हैं, तो आपके पेट में अजीब सी हलचल होने लगती है? या जब आप अकेलापन महसूस करते हैं, तो आपका खाना ठीक से नहीं पचता? गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च से यह साफ हुआ है कि अकेलेपन और लगातार रहने वाले मानसिक तनाव का हमारी गट हेल्थ यानी पेट की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, दुनिया भर में 40% से ज्यादा लोगों को किसी न किसी तरह की पेट है। आइए जानते हैं कि हमारे तनाव का हमारी पेट की सेहत से क्या कनेक्शन है?
इस रिसर्च के सह-लेखक और व्रोकला मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अगाता मुलक ने बताया कि पहले डॉक्टर सिर्फ दवाओं पर ध्यान देते थे। लेकिन अब समझ आया है कि सामाजिक और सांस्कृतिक बातें भी हमारी सेहत को तय करती हैं। अगर कोई व्यक्ति समाज में अकेला है, उसके पास दोस्तों या परिवार का साथ नहीं है, तो उसके शरीर में तनाव का स्तर बहुत बढ़ जाता है। यह तनाव पेट की दीवारों को कमजोर कर देता है और पाचन क्रिया की रफ्तार को पूरी तरह बिगाड़ देता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हमारे शरीर के अंदर एक अनोखा नेटवर्क काम करता है जिसे वैज्ञानिक गट-ब्रेन एक्सिस कहते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि हमारा दिमाग और हमारा पेट आपस में वॉकी-टॉकी की तरह लगातार बातचीत करते रहते हैं। हमारे पेट के अंदर करोड़ों छोटे-छोटे बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीव होते हैं, जिन्हें माइक्रोबायोटा कहा जाता है। ये हमारे दोस्त होते हैं जो खाना पचाने में मदद करते हैं। लेकिन जब हम बहुत ज्यादा तनाव लेते हैं, तो दिमाग से निकलने वाले स्ट्रेस हार्मोन्स इस बातचीत को बिगाड़ देते हैं। इससे पेट के अच्छे बैक्टीरिया मरने लगते हैं और पेट का संतुलन पूरी तरह खराब हो जाता है।
आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोगों का पेट हमेशा खराब रहता है, जैसे पेट में दर्द होना, पेट फूलना, दस्त या कब्ज होना। जब वे डॉक्टर के पास जाते हैं और सारे टेस्ट करवाते हैं, तो रिपोर्ट्स बिल्कुल नॉर्मल आती हैं। इसे ही डीजीबीआई (गट-ब्रेन इंटरैक्शन के विकार) कहते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण आईबीएस (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) है। रिसर्च कहती है कि इसका कारण पेट की खराबी में नहीं, बल्कि हमारे मानसिक तनाव और अकेलेपन में छिपा होता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
06 Jun 2026 03:59 pm
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