
water Intoxication (Image- gemini AI)
Water Intoxication: आपने अक्सर सबको यह कहते सुना होगा कि हमें जितना हो सके उतना ज्यादा पानी पीना चाहिए। मौसम चाहे कोई भी हो, हमें प्यास लगे या न लगे, लेकिन हमें पानी पीते रहना चाहिए। लेकिन सोचिए, अगर कोई डॉक्टर आपसे यह कहे कि जरूरत से ज्यादा पानी पीना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है, तो क्या आपको भरोसा होगा?
जी हां, यह सच है। अगर आप बहुत कम समय में बहुत ज्यादा पानी पीते हैं, तो मेडिकल साइंस की भाषा में इसे 'Water Intoxication' कहा जाता है। अब यह बात तो आप भी जानते हैं कि अति हर चीज की बुरी होती है, फिर चाहे वह अमृत ही क्यों न हो। आइए, डॉ. रवि के. गुप्ता (M.D.) से जानते हैं कि हाइड्रेशन का असली मतलब क्या होता है और पानी पीने का सही तरीका क्या है?
जब हम बहुत कम समय अंतराल में बहुत ज्यादा पानी पी लेते हैं तो इससे होता क्या है की हमारे ब्लड में जो सोडियम होता है वो टूटने लगता है। सोडियम का काम शरीर की कोशिकाओं के अंदर और बाहर पानी का संतुलन बनाए रखना है। जब सोडियम कम होता है, तो पानी शरीर की कोशिकाओं के अंदर घुसकर उन्हें फुला देता है। जब यह सूजन दिमाग की कोशिकाओं में होती है, तो उसे वॉटर इंटॉक्सिकेशन या हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं।
जब पेशाब बिल्कुल सफेद होता है, तो इसका मतलब है कि आपकी किडनी बहुत तेजी से पानी बाहर निकाल रही है। इससे शरीर में जरूरी नमक (Electrolytes) कम हो सकते हैं। आप दिन में बहुत ज्यादा बार (10-12 बार से अधिक) पेशाब करने जा रहे हैं और वह बिल्कुल रंगहीन है, तो यह ओवरहाइड्रेशन है। प्यास न होने पर भी जबरदस्ती पानी पीने से सिर में भारीपन महसूस हो सकता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
09 Apr 2026 10:55 am
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