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Drowning Prevention: हर साल लाखों लोगों की डूबने से जाती है जान, WHO ने बचाव के लिए जारी की 7 नई रणनीतियां

WHO on Drowning Prevention Hindi: WHO के मुताबिक हर साल लाखों लोग डूबने से जान गंवाते हैं। जानिए WHO के बताए बचाव के 7 आसान तरीके, जो आपके और आपके परिवार की जान बचा सकते हैं।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 28, 2026

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अगर हम अपने आसपास कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें और सही तरीके अपनाएं, तो डूबने को लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

WHO on Drowning Prevention: जब गर्मी का मौसम आता है या छुट्टियों में हम किसी नदी, तालाब या स्विमिंग पूल के किनारे घूमते हैं, तो पानी में छलांग लगाने का मन सभी का करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरा सी लापरवाही में हंसी-खुशी का यह माहौल पलभर में मातम में बदल जाता है? दुनिया भर में हर साल डूबने की वजह से लाखों लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि इनमें से ज्यादातर मासूम बच्चे होते हैं जो अपनी समझ की कमी या बड़ों की अनदेखी की वजह से हादसे का शिकार हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यह बताया गया है कि अगर हम अपने आसपास कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें और सही तरीके अपनाएं, तो इन हादसों को लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है। आइए जानते हैं कि WHO की वे कौन सी 7 आसान बातें हैं जो किसी की अनमोल जिंदगी बचा सकती हैं।

कोई व्यक्ति कब डूबता है या डूबना किसे कहते हैं?

सीडीसी के अनुसार, जब किसी इंसान का नाक और मुंह बहुत देर तक पानी (या किसी भी तरल चीज) के अंदर रहता है और उसे सांस लेने की जगह नहीं मिलती, तो उसे डूबना कहते हैं। पानी में नाक-मुंह बंद हो जाने की वजह से इंसान सांस नहीं ले पाता और उसका दम घुटने लगता है। हालांकि, हर बार डूबने का मतलब जान जाना ही नहीं होता, समय पर मदद मिलने से इंसान की जान बचाई भी जा सकती है।

1. पानी की जगहों पर मजबूत बाड़ या जाली लगाना

गांवों और छोटे कस्बों में अक्सर घर के आसपास खुले कुएं, तालाब, पानी की टंकियां या गहरे गड्ढे होते हैं। छोटे बच्चे खेलते-खेलते कब पानी के पास पहुंच जाते हैं, पता ही नहीं चलता। WHO का कहना है कि ऐसी सभी जगहों के चारों तरफ लोहे की मजबूत जाली या बाड़ लगाई जानी चाहिए। अगर पानी वाली जगहें ढकी रहेंगी, तो बच्चे अनजाने में वहां तक नहीं पहुंच पाएंगे।

2. बच्चों के लिए सुरक्षित डे-केयर

अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता जब खेतों में या मजदूरी के लिए बाहर काम करने जाते हैं, तो बच्चे घर पर अकेले रह जाते हैं। ऐसे में वे खेलते-खेलते पास के किसी पानी के पोखर या नदी की तरफ चले जाते हैं। अगर गांव या मोहल्ले में बच्चों को संभालने के लिए सुरक्षित 'डे-केयर' या आंगनवाड़ी जैसी व्यवस्था हो, तो जब तक मां-बाप काम पर रहेंगे, बच्चे सुरक्षित रहेंगे और ऐसे हादसों से बच पाएंगे।

3. बच्चों को तैरना और पानी की सुरक्षा सिखाना

जैसे हम बच्चों को सड़क पर सही से चलना सिखाते हैं, वैसे ही उन्हें तैरना सिखाना भी बहुत जरूरी है। स्कूल जाने की उम्र से ही बच्चों को तैराकी की बुनियादी बातें सिखाई जानी चाहिए। अगर बच्चा तैरना जानता है और उसे पानी का अंदाजा है, तो अचानक पानी में गिर जाने पर भी वह घबराएगा नहीं और खुद को संभाल सकेगा।

4. प्राथमिक चिकित्सा और CPR की ट्रेनिंग

पानी में डूबते इंसान को बाहर निकालने का सही तरीका और बाहर निकालते ही दी जाने वाली पहली मदद (First Aid) के बारे में हर आम इंसान को पता होना चाहिए। अगर किसी को पानी से बाहर निकालकर तुरंत उसकी छाती दबाकर सांस देने (CPR) की ट्रेनिंग दी गई हो, तो डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले ही मरीज को एक नया जीवन मिल सकता है।

5. नाव और बोटिंग के नियमों में बिल्कुल ढिलाई न बरतना

अक्सर लोग जब किसी मेले या धार्मिक यात्रा पर जाते हैं, तो क्षमता से ज्यादा भरी हुई नावों में बैठ जाते हैं। यह बहुत खतरनाक हो सकता है। जब भी आप किसी नाव या बोट में बैठें, तो लाइफ जैकेट (Life Jacket) जरूर पहनें। इसके अलावा, अगर मौसम खराब हो या हवाएं तेज चल रही हों, तो कभी भी पानी में उतरने का जोखिम न उठाएं।

6. बाढ़ और मानसूनी खतरों से बचाव की तैयारी

मानसून के दौरान नदियां उफान पर होती हैं और अचानक बाढ़ आने का खतरा रहता है। ऐसे समय में लोगों को पानी के तेज बहाव के खतरों से पहले ही आगाह कर देना चाहिए। जो इलाके जोखिम वाले हैं, वहां से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना और तेज पानी में उतरने से रोकना बहुत जरूरी है।

7. सरकारों द्वारा सख्त नियम बनाना

डूबने के हादसों को सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर नहीं रोका जा सकता। सरकारों को भी इसके लिए मजबूत नीतियां बनानी चाहिए। सार्वजनिक वाटर पार्क, समुद्र तटों (Beaches) और घाटों पर प्रशिक्षित लाइफगार्ड की तैनाती होनी चाहिए जो हर वक्त चौकन्ने रहें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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