
अर्ध मत्स्येन्द्रासन से एड्रिनल ग्रंथि होगी मजबूत, PC- IANS
बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण लोगों को कमर में अकड़न, तनाव और पाचन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखने में मदद कर सकता है। योग के महत्वपूर्ण आसनों में शामिल 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाने और पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करने के लिए जाना जाता है। पारंपरिक योग पद्धति में इसे एड्रिनल ग्रंथि सहित शरीर के कई अंगों के लिए भी लाभकारी माना गया है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन बैठकर किया जाने वाला एक योगासन है, जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से को एक ओर मोड़ा जाता है। इसका नाम महान योगी मत्स्येन्द्रनाथ के नाम पर रखा गया है। संस्कृत में 'अर्ध' का अर्थ आधा है। इसे अंग्रेजी में 'हाफ स्पाइनल ट्विस्ट पोज' भी कहा जाता है। यह आसन मुख्य रूप से रीढ़ की गतिशीलता और पीठ की मांसपेशियों के लचीलेपन पर काम करता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की योग संबंधी अध्ययन सामग्री में अर्ध मत्स्येन्द्रासन को एड्रिनल ग्रंथियों, गुर्दों, यकृत और प्लीहा के लिए लाभकारी बताया गया है। हालांकि, इन अंगों की कार्यप्रणाली में सुधार के दावों की पुष्टि के लिए और वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हैं।
एड्रिनल ग्रंथियां दोनों गुर्दों के ऊपर स्थित होती हैं। ये कोर्टिसोल और एड्रिनलिन सहित कई महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती हैं, जो तनाव के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया, रक्तचाप और ऊर्जा के उपयोग में भूमिका निभाते हैं। योग और तनाव में कमी के बीच संबंध पर कुछ वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं, लेकिन केवल अर्ध मत्स्येन्द्रासन करने से कोर्टिसोल नियंत्रित होने या एड्रिनल ग्रंथियां मजबूत होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन के अभ्यास के दौरान पेट, कमर और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव होता है। योग की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस आसन से पाचन संबंधी कार्यों को सहयोग मिल सकता है। कब्ज और पेट की अन्य समस्याओं में भी इसे उपयोगी माना जाता है। हालांकि, इन बीमारियों के उपचार के रूप में इसकी प्रभावशीलता पूरी तरह स्थापित नहीं हुई है।
इस आसन का एक प्रमुख लाभ रीढ़ और उसके आसपास की मांसपेशियों की गतिशीलता बढ़ाना है। नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर पीठ की अकड़न कम करने तथा शरीर की मुद्रा बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी व्यायाम हो सकता है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं।
कुछ योग पद्धतियों में अर्ध मत्स्येन्द्रासन को अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज की कार्यप्रणाली के लिए भी लाभकारी बताया जाता है। व्यापक योग कार्यक्रमों पर हुए कुछ अध्ययनों में टाइप-2 मधुमेह के मरीजों में रक्त शर्करा नियंत्रण पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया है।
हालांकि, केवल इस आसन से अग्न्याशय सक्रिय होने, इंसुलिन उत्पादन बढ़ने या मधुमेह नियंत्रित होने का पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए मधुमेह के मरीजों को निर्धारित दवाओं और चिकित्सकीय सलाह के साथ ही योग का अभ्यास करना चाहिए।
इसी तरह, नियमित योगाभ्यास मानसिक तनाव कम करने और आराम महसूस कराने में मददगार हो सकता है। लेकिन इसे हार्मोन संबंधी समस्याओं का स्वतंत्र उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाएं। इसके बाद बाएं घुटने को मोड़कर बाएं पैर को दाहिने नितंब के पास रखें। अब दाहिने पैर को मोड़कर उसका पंजा बाएं घुटने के बाहर जमीन पर टिकाएं।
रीढ़ को सीधा रखते हुए धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी हिस्से को दाईं ओर मोड़ें। बाएं हाथ से दाहिने पैर को पकड़ने का प्रयास करें और दाहिने हाथ को पीठ के पीछे रखें। सामान्य रूप से सांस लेते हुए लगभग 20 से 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें और दूसरी ओर भी यही प्रक्रिया दोहराएं। शुरुआत में प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन के दौरान रीढ़ और पेट पर खिंचाव पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इस आसन से बचना चाहिए। स्लिप डिस्क, रीढ़ की गंभीर चोट, हर्निया या पेप्टिक अल्सर से पीड़ित लोगों को भी चिकित्सकीय सलाह के बिना इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
आयुष मंत्रालय की किशोरों के लिए जारी योग सामग्री में मासिक धर्म के दौरान इस आसन से बचने की सलाह दी गई है। हालांकि, यह सभी महिलाओं के लिए सार्वभौमिक चिकित्सकीय प्रतिबंध नहीं है। मासिक धर्म के समय दर्द या असुविधा होने पर अभ्यास टालना उचित है।
योग करते समय शरीर को जबरदस्ती मोड़ने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार का तेज दर्द, चक्कर या असहजता महसूस होने पर तुरंत आसन छोड़ देना चाहिए। सही तकनीक और नियमित अभ्यास के साथ अर्ध मत्स्येन्द्रासन स्वस्थ जीवनशैली का उपयोगी हिस्सा बन सकता है।
Updated on:
3 Nov 2026, 12:52 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 12:52 PM IST
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