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मिर्चपुर में दलित बुजुर्ग और दिव्यांग बेटी को जिंदा जलाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 लोगों को सुनाई उम्रकैद की सजा

इनमें से कुछ को ट्रॉयल कोर्ट ने बरी कर दिया था...
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हिसार

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Prateek Saini

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Updated: 24 Aug 2018, 7:20 PM IST

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(चंडीगढ़): हिसार के मिर्चपुर गांव में 2010 में एक विवाद के बाद दलितों के घर जलाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया। इसमें हाईकोर्ट ने 20 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इनमें से कुछ को ट्रॉयल कोर्ट ने बरी कर दिया था। दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने मिर्चपुर कांड में दोषी ठहराए गए 15 आरोपियों में से घर जलाने वाले तीन को उम्रकैद और पांच दोषियों को पांच-पांच वर्ष कैद समेत 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।

यह हुआ था

अप्रेल 2010 में मामूली विवाद में जाटों और दलितों में टकराव हो गया था। इसके बाद जाटों के समूह ने दलितों की बस्ती पर हमला कर दिया था और उनके घरों को आग लगा दी थी। इससे 70 साल के एक वृद्ध और उसकी दिव्यांग बेटी की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में जाट समुदाय के उन लोगों को भी दोषी ठहराया है, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी में कहा, जाट समुदाय ने जानबूझकर बाल्मीकी समुदाय के लोगों पर हमला किया। साल 2011 में रोहिणी कोर्ट ने अपने फैसले में 82 आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि 15 को दोषी बताते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई थी। यह मामला पूरे देश में सर्खियों में आ गया था। दलित समुदाय के लोग गांव से पलायन कर गए थे। वे हिसार में कई साल तक रहे। इस घटना से हरियाणा की राजनीति काफी गर्मा गई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार निशाने पर आ गई थी। राहुल गांधी सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने गांव का दौरा किया था। राज्य खासकर मिर्चपुर के आसपास के क्षेत्र में जाट और गैरजाट के विवाद के कारण तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए थे।

यह था मामला

21 अप्रेल, 2010 को गांव में कुछ जाट युवक वाल्मीकि समाज की बस्ती की ओर से गुजर रहे थे, जिन्हें देखकर वहां कुत्ते भौंकने लग गए। इन युवकों को असमय इन कुत्तों का भौंकना रास नहीं आया। आम दिनों की तरह ही मामला गाली-गलौज से होता हुआ मार-पीट तक पहुंच गया, जिसमें कर्णपाल और वीरभान नामक दलित युवक बुरी तरह जख्मी हो गए थे। मामला यहीं तक रहता तो गनीमत थी, लेकिन हालात उस वक्त और भी खतरनाक हो गए, जब जाट समुदाय के करीब 400 लोगों ने दलितों के घरों को चारों ओर से घेर लिया और आग लगा दी। जलते घरों में सोलह साल की विकलांग बच्ची सुमन और उसके पिता ताराचंद की जिंदा जलने से मौत हो गई। 25 घर जले थे और 52 लोग घायल हो गए थे। जनवरी, 2011 को 130 से ज्यादा दलित परिवारों ने गांव से पलायन कर दिया था।

IMAGE CREDIT: पत्रिका ब्यूरो

हरियाणा में सुनवाई न होकर दिल्ली में हुई मामले की सुनवाई

घटना हरियाणा में हुई थी लेकिन उसके बावजूद इसके, पूरे मामले की सुनवाई पहले दिल्ली की निचली अदालत और फिर दिल्ली हाईकोर्ट में हुई। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुआ, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को लगा कि दलितों से जुड़े इस मामले की ठीक से सुनवाई हरियाणा में नहीं हो सकती और इस मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित करना आसान होगा। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा सरकार ने इस पूरे मामले को सुनवाई के लिए दिल्ली में ट्रांसफर कर दिया था।

IMAGE CREDIT: पत्रिका ब्यूरो

वेदपाल तंवर के फार्म हाऊस में रह रहे हैं मिर्चपुर के 130 दलित परिवार अब ये परिवार हिसार के कैमरी रोड क्षेत्र में वेदपाल तंवर के फार्म हाउस में शरण लिए हुए हैं। वैसे मिर्चपर गांव में अब भी 40 दलित परिवर रह रहे हैं।