
जब शायर कैफ़ी आज़मी की ग़ज़ल सुन इस लड़की ने तोड़ दी थी अपनी मंगनी, आज ही के दिन दुनिया को कह गए थे अलविदा
नई दिल्ली। 10 मई 2002 मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी ( Kaifi Azmi ) का निधन हो गया। यूपी के आजमगढ़ ( Azamgarh ) जिले के मज़वां गांव से ताल्लुक रखने वाले कैफ़ी केवल 11 साल के थे जब उन्होंने अपने जीवन की पहली ग़ज़ल लिखी थी। जब कैफ़ी धीरे-धीरे बड़े हो रहे थे तो वे अक्सर मुशायरे में शिरकत लेते थे। उनकी रचनाओं में आवारा सज़दे, इंकार, आख़िरे-शब आदि प्रमुख हैं। कैफ़ी ने हिंदी फिल्म जगत को भी कई बेहतरीन नग्में दिए। ये खूबसूरत नग्में आज भी लोगों के ज़हन में ताज़ा हैं। कैफ़ी आज़मी वही हैं जिन्होंने देशभक्ति का अमर गीत -"कर चले हम फिदा, जान-ओ-तन साथियों" लिखा है।
आज़मी को राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा कई बार फिल्मफेयर अवॉर्ड ( Filmfare Awards ) भी मिला है। यूं तो उनकी ज़िंदगी से जुड़े कई किस्से हैं लेकिन एक किस्सा है जो सबसे ज्यादा खास है। हैदराबाद ( Hyderabad ) के एक मुशायरे में जब कैफ़ी आज़मी अपनी एक नज़्म सुना रहे थे तो उसे सुनाने के उनके अंदाज़ ने एक लड़की को किसी और के साथ अपनी मंगनी तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। यह लड़की बाद में कैफ़ी आज़मी की पत्नी बनी। नज़्म को सुनने के बाद ही शौकत ने अपने वालिद से कहा कि वो अगर शादी करेंगी तो सिर्फ़ कैफ़ी से ही। यह सुनकर शकत के पिता ने रिवॉल्वर से ख़ुदकुशी करने की कोशिश की।
एक मीडिया चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में शौकत बताती हैं कि "मेरे पिता ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें बंबई लेकर जाऊंगा। वहां चलकर तुम देख लेना कि कैफ़ी किस तरह की ज़िंदगी बसर कर रहा है। यह देखकर ही तुम उससे शादी करने का फैसला करना।" कैफ़ी से मुलाकात के बाद शौकत के पिता ने उनसे उनकी राय पूछी तो शौकत ने अपने पिता की आंखों में आंखें डालकर कहा कि "कैफ़ी मिट्टी उठाएंगे या मज़दूरी भी करेंगे तो मैं उनके साथ मज़दूरी भी करूंगी लेकिन शादी तो उन्हीं से करूंगी।" शौकत के उस आत्मविश्वास को देखते हुए उनके पिता ने अगले दिन ही उनका निकाह कैफ़ी से करा दिया।
Updated on:
10 May 2019, 8:10 AM IST
Published on:
10 May 2019, 7:00 AM IST
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