
नई दिल्ली: आज पूरे देश की नजर सुप्रीम कोर्ट पर लगी हुई थी क्योंकि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा राम मंदिर का फैसला जो आना था। फैसला आया और कोर्ट ने साफ करते हुए विवादित जमीन रामलला को सौंप दी है। वहीं मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है। यानि सुन्नी वफ्फ बोर्ड को कोर्ट ने अयोध्या में ही अलग जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ये रामलला है कौन? चलिए बताते हैं आपको।
क्या है ASI के प्रमाण, आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर फैसले में इन्हें बनाया आधार
रामलला हैं कौन?
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का मालिक रामलला ( Ramlala ) को माना है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि रामलला न तो कोई संस्था है, न ही कोई ट्रस्ट है। बल्कि यहां पर बात खुद भगवान राम के बाल स्वरुप की हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने रमलला को लीगल इन्टिटी मानते हुए जमीन का हक उन्हें दिया है। हिंदू परंपरा के अनुसार, भगवान को वैध व्यक्ति माना गया है, जिनके अधिकार और कर्तव्य होते हैं। भगवान किसी संपत्ति के मालिक भी हो सकते हैं। साथ ही वो किसी पर मुकदमा दर्ज कर सकते हैं या उनके नाम पर मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। हिंदू कानून में देवताओं की मूर्तियों को वैध व्यक्ति माना गया है। विवादित स्थल पर जहां राम लला की जन्मभूमि मानी जाती है, वहां राम लला एक नाबालिग रूप में थे।
सदियों से राम चबूतरे पर विराजमान थीं
22-23 दिसंबर 1949 की रात मस्जिद के भीतरी हिस्से में रामलला की मूर्तियां रखी गईं थी। 23 दिसंबर 1949 की सुबह बाबरी मस्जिद के मुख्य गुंबद के ठीक नीचे वाले कमरे में वही मूर्तियां प्रकट हुई थीं, जो कई दशकों या सदियों से राम चबूतरे पर विराजमान थीं और जिनके लिए वहीं की सीता रसोई या कौशल्या रसोई में भोग बनता था। राम चबूतरा और सीता रसोई निर्मोही अखाड़ा के नियंत्रण में थे और उसी अखाड़े के साधु-संन्यासी वहां पूजा-पाठ आदि विधान करते थे। इसके बाद 23 दिसंबर को मस्जिद में मूर्तियां रखने का मुकदमा पुलिस ने दर्ज किया था। इसी के आधार पर 29 दिसंबर 1949 को मस्जिद कुर्क कर वहां ताला लगा दिया गया था।
रामलला को माना असली मालिक
इसके बाद साल 1989 में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज देवकी नंदन अग्रवाल ने भगवान राम के सखा यानि मित्र के रूप में पांचवां दावा फैजाबाद की अदालत में दायर किया। इसके बाद ये क्रम आगे बढ़ा। कई घटनाक्रम घटे और आखिर में आज शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को ही असली मालिक माना है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नाराज है। उनका कहना है कि वो इसके खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करेंगे।
Published on:
09 Nov 2019 02:44 pm
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