27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

36 साल से तपस्या की राह पर भवरलाल जैन, आयंबिल के 100 दिन पूरे

जैन धर्म में तपस्या को आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण मार्ग माना गया है। इसी भावना के साथ हुब्बल्ली में रह रहे राजस्थान के बालोतरा जिले के सिवाना मूल के भवरलाल सी. जैन लक्की ने आयंबिल तप के 100 दिन पूरे किए हैं। सोमवार, 26 अक्टूबर को उनकी तपस्या का 100वां दिन रहा। वे मंगलवार, 27 अक्टूबर को पारणा करेंगे।
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

हुबली

•

image

ASHOK SINGH RAJPUROHIT

•

Updated: 26 Oct 2026, 7:55 PM IST

आयंबिल तप के 100 दिन पूरे करने वाले हुब्बल्ली निवासी भवरलाल सी. जैन लक्की।

आयंबिल तप के 100 दिन पूरे करने वाले हुब्बल्ली निवासी भवरलाल सी. जैन लक्की।

भवरलाल जैन पिछले 36 वर्षों से आयंबिल तप कर रहे हैं। उनका मानना है कि आयंबिल केवल तपस्या नहीं, बल्कि आत्मसंयम का अभ्यास है। इससे आत्मबल बढ़ता है, सोच सकारात्मक बनती है और क्रोध पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।

सादे भोजन से स्वाद पर नियंत्रण का अभ्यास

जैन धर्म में आयंबिल तप का विशेष महत्व है। इसमें साधक निर्धारित नियमों के अनुसार दिन में एक बार सादा भोजन ग्रहण करता है। भोजन में अनाज और दालों को उबालकर सीमित पदार्थों के साथ लिया जाता है। इस दौरान तेल, घी, दूध, दही, मिठाई, फल, हरी सब्जियों और स्वाद बढ़ाने वाली अन्य वस्तुओं का त्याग किया जाता है। इस तप का उद्देश्य स्वाद की लालसा पर नियंत्रण रखते हुए मन को धार्मिक साधना की ओर केंद्रित करना है।

पिछले वर्ष भी 91 दिन की तपस्या

भवरलाल जैन की तपस्या का सिलसिला वर्षों से जारी है। उन्होंने पिछले वर्ष भी 91 दिन तक आयंबिल किया था। इसके अलावा वे अब तक 47 बार आठ दिन की अट्ठाई सहित नौ, 11 और 15 दिन की तपस्या कर चुके हैं। वर्धमान तप की ओली भी 43 बार पूरी कर चुके हैं।

परिवार भी धर्म आराधना में आगे

भवरलाल जैन के साथ उनका परिवार भी धार्मिक साधना में सहभागी है। उनकी पत्नी गुलाब बी. जैन, बेटी पायल जी. सालेचा, बेटे प्रदीप बी. जैन और बहू अर्पिता पी. जैन ने नौ दिन की नवपद ओली की है। उनके बड़े भाई मदनलाल सी. जैन लक्की भी 39 आयंबिल और 11 उपवास कर चुके हैं।
इस तरह परिवार के कई सदस्य तपस्या और धार्मिक आराधना से जुड़े हुए हैं। भंवरलाल जैन की 100 दिन की आयंबिल साधना उनके लंबे धार्मिक अनुशासन और आत्मसंयम के संकल्प को दर्शाती है।