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हुब्बल्ली में नरसिंह वीरधाम लूणावास के वागाराम चौधरी भोपाजी का स्वागत, राजेश्वर भवन में सत्संग-भजन में उमड़े श्रद्धालु

राजस्थान के जालोर जिले के लूणावास स्थित 52 नरसिंह वीरधाम के प्रमुख सेवादार वागाराम चौधरी भोपाजी के हुब्बल्ली आगमन पर बुधवार को श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। गोकुल रोड स्थित राजेश्वर भवन में उनके सान्निध्य में सत्संग एवं भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। राजस्थान मूल के समाजबंधुओं के साथ शहर के अन्य श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भोपाजी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
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राजेश्वर भवन में नरसिंह वीरधाम लूणावास के वागाराम चौधरी भोपाजी के सान्निध्य में सत्संग-भजन में शामिल श्रद्धालु।

राजेश्वर भवन में नरसिंह वीरधाम लूणावास के वागाराम चौधरी भोपाजी के सान्निध्य में सत्संग-भजन में शामिल श्रद्धालु।

दक्षिण भारत की यात्रा पर निकले

वागाराम चौधरी भोपाजी इन दिनों दक्षिण भारत की यात्रा पर हैं। मुंबई और कोल्हापुर होते हुए वे हुब्बल्ली पहुंचे। राजेश्वर भवन में आयोजित कार्यक्रम के बाद वे दोपहर में बेंगलूरु के लिए रवाना हुए। सत्संग के दौरान धार्मिक आस्था, सेवा और समाज की परंपराओं से जुड़े विषयों पर विचार रखे गए। इसके बाद भजन-कीर्तन हुआ। भक्ति गीतों के दौरान महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सहभागिता की। भजनों से राजेश्वर भवन का वातावरण भक्तिमय हो गया।

लूणावास धाम से जुड़ी आस्था

आयोजकों ने बताया कि 52 नरसिंह वीरधाम लूणावास राजस्थान के जालोर जिले का प्रमुख धार्मिक आस्था केंद्र है। यहां 52 वीर नरसिंह एवं मोमाजी महाराज की आराधना की जाती है। लूणावास सहित आसपास के क्षेत्रों और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु धाम पहुंचते हैं। धाम की धार्मिक परंपराओं से प्रवासी राजस्थानी समाज भी गहराई से जुड़ा हुआ है। हुब्बल्ली में बसे राजस्थान मूल के परिवारों के लिए वागाराम चौधरी भोपाजी का आगमन धार्मिक आस्था के साथ अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी बना। श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया और परिवार व समाज की सुख-समृद्धि की कामना के साथ आशीर्वाद लिया।

भजनों में लीन हुए श्रद्धालु

भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। महिला-पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भजनों में सहभागिता की। आयोजकों के अनुसार, ऐसे धार्मिक आयोजन प्रवासी समाज को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़े रखने के साथ नई पीढ़ी को भी अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं।