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निस्वार्थ भाव से सेवा: साधु-संतों के विहार व गोचरी के समय रहते हैं तत्पर

होसपेट के 50 किमी क्षेत्र में सेवा कार्य कर रहा अर्हम ग्रुप होसपेट
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हुबली

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ASHOK SINGH RAJPUROHIT

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Updated: 18 Dec 2024, 7:51 PM IST

साधु-संतों के विहार के दौरान अर्हम ग्रुप के सदस्य। (फाइलफोटो)

साधु-संतों के विहार के दौरान अर्हम ग्रुप के सदस्य। (फाइलफोटो)

जैन साधु-संतों की निस्वार्थ भावना से सेवा कार्य को लेकर अर्हम ग्रुप होसपेट (कर्नाटक) पिछले 13 वर्ष से अपनी सेवाएं दे रहा है। साधु-संतों के विहार एवं गोचरी के समय अर्हम ग्रुप के सदस्य सेवा में तत्पर रहते हैं। चातुर्मास एवं धार्मिक-सामाजिक आयोजनों में भी अर्हम ग्रुप अपनी सेवाएं देता है। धर्म एवं समाज की संस्कृति को पुष्पित-पल्लवित करने में ग्रुप के सदस्यों का हर समय योगदान रहता है।

पहले आदिनाथ वयावच ग्रुप
अर्हम ग्रुप के गठन के समय से ही जुड़े हुए अर्हम ग्रुप के उपाध्यक्ष सुरेश श्रीश्रीमाल रमणिया ने बताया कि पहले आदिनाथ वयावच ग्रुप नाम था। बाद में नाम बदलकर अर्हम ग्रुप कर दिया गया। सारा कार्य श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर संघ के दिशा-निर्देशन में ही किया जा रहा है। होसपेट से करीब 50 किमी की दूरी तक भी सेवा के काम किए जाते हैं। होसपेट के आसपास के इलाकों कुष्ठगी, तोरंगल, गिंगेरा, बुकसागर, मरेमनहल्ली तक सेवाएं दे रहे हैं।

सेवा भावना सर्वोपरि
अर्हम ग्रुप के सदस्यों में सेवा भावना कूट-कूट कर भरी है। विहार एवं गोचरी के लिए सेवाएं देने के साथ ही समाज के अन्य धार्मिक-साामाजिक सेवा कार्य में भी अहम भूमिका रहती है। समाज के हर कार्य में आगे रहते हैं। अर्हम ग्रुप के सदस्यों में समाज के प्रति समर्पण झलकता है। यही वजह है कि अर्हम ग्रुप के सदस्य रहे बाबूलाल श्रीश्रीमाल सिवाना ने करीब छह वर्ष पहले दीक्षा ली थी।

ग्रुप की कार्यकारिणी
अर्हम ग्रुप होसपेट के अध्यक्ष नवीन विनायकिया खांडप, उपाध्यक्ष सुरेश श्रीश्रीमाल रमणिया, सचिव जीतू संकलेचा सिवाना एवं कोषाध्यक्ष नीतेश बाफना सिवाना है। अर्हम ग्रुप में करीब 40 सदस्य जुड़े हुए हैं। सभी निस्वार्थ भावना से काम करते हैं। समाज के हर कार्य में सभी सदस्य सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं।