
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया मेट्रो का वर्चुअली उद्घाटन, गांधी नगर स्टेशन से निकले मेट्रो की पहली राइड. (फोटो सोर्स: पत्रिका)
Indore Metro Train Running First time: 14 साल लगे, लेकिन प्रदेशवासियों का मेट्रो ट्रन का सपना पूरा हो गया। 2011 के आसपास शुरू हुई शहर में मेट्रो ट्रेन का संचालन करने की चर्चा आखिरकार 2025 में पटरी पर रफ्तार भरती नजर आ रही है। पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती के अवसर पर राजधानी भोपाल से एमपी और इंदौर की पहली मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ किया।
बता दें कि लोकमाता अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर मेट्रो को हरी झंडी दिखाने से पहले मेट्रो स्टेशन पर स्थापित देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा का का माल्यार्पण किया गया। इसके बाद पीएम मोदी ने भोपाल से इंदौर मेट्रो ट्रेन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाई।
इंदौर मेट्रो की पहली राइड महिलाओं के नाम रही। इसमें एक दिव्यांग महिला समेत कई महिलाओं ने सफर का आनंद लिया। इस दौरान महिलाएं ट्रेन में लोक गीत गाती हुईं नजर आईं। मेट्रो में बुजुर्ग. युवा और बच्चियां सभी उत्साहित नजर आईं। ट्रेन में बैठी महिलाओं के हाथों में मिट्टी से बने शिवलिंग थे। सभी का उत्साह देखते बन रहा था। अब तक ऑटो, ई-रिक्शा और बस का सफर करने वाले अब मेट्रो से शानदार और आसान सफर करेंगे।
मेट्रो ट्रेन में सफर कर रहे सांसद शंकर लालवानी ने इस अवसर पर पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पहला सफर मातृशक्ति के नाम रहा। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों को बधाई दी।
इंदौर मेट्रो के टर्मिनल का नाम देवी अहिल्या बाई होलकर स्टेशन रखा गया है। वहीं इसके अन्य सभी स्टेशनों के नाम भी वीरांगनाओं के नाम पर ही रखे गए हैं। पहले दिन टर्मिनल से निकलने के बाद मेट्रो महारानी लक्ष्मीबाई स्टेशन, रानी अवंती बाई लोधी स्टेशन और रानी दुर्गावती स्टेशन, फिर वीरांगना झलकारी बाई स्टेशन तक चली।
इंदौर में पहली बार चली मेट्रो 12.20 बजे आखिरी स्टेशन वीरांगना झलकारी बाई स्टेशन पर पहुंची। मेट्रो ने 5.9 किमी का ये सफर 11 मिनट में पूरा किया। इस दौरान मेट्रो कहीं नहीं रुकी।
पहले सप्ताह में मेट्रो का संचालन नि:शुल्क रहेगा। ट्रेन का शेड्यूल सुबह 8 से रात 8 तक रहेगा। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का दावा है कि हर 30 मिनट में मेट्रो ट्रेन उपलब्ध रहेगी। न्यूनतम किराया 20 तो अधिकतम 30 रुपए रखा गया है। शुरुआत में 10 कोच चलाने की योजना है।
सरकार ने इंदौर मेट्रो में 3 डिब्बों के 75 कोच चलाने का फैसला किया है। अब तक 14 कोच आए हैं। पहला कोच 31 अगस्त 2023 को वडोदरा की कंपनी से सड़क मार्ग से लाया गया था। कोच एआइ तकनीक से लैस हैं। दावा है कि कोच या ट्रैक पर आपत्तिजनक वस्तु रखी होगी तो कैमरे अलर्ट कर देंगे। ट्रैक पर व्यवधान रहा तो एआइ तकनीक खुद ब्रेक लगा देगी। ऊर्जा संरक्षण भी ऑटोमेटिक मोड पर है। ट्रेन बिना पायलट भी चल सकती है, लेकिन शुरुआती दौर में पायलट ही इसका संचालन करेंगे।
वर्ष 2022 तक मेट्रो कॉरिडोर का ज्यादा काम नहीं हुआ था। गांधी नगर डिपो बनाने में प्लानिंग बदली और 40 मकानों को बचाकर डिपो का काम शुरू किया। गांधी नगर से टीसीएस चौराहे तक पीलर बनानेे का काम नहीं हुआ था। इसके लिए योजना बनाई गई। आइडीए से संपर्क कर जमीनों का मामला क्लियर किया। जब सेगमेंट लॉन्च करने की बात आई तो एक साथ 7 लांचर लगाए गए। इससे काम में तेजी आई। इसमें करीब 650 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
केएस चौहान (मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के पहले जीएम)
वर्ष 2011-12 में मेट्रो का क्रॉस रूट तय हुआ था। एक रूट में देवास नाका से पाटनीपुरा चौराहा होते हुए रेलवे स्टेशन और वहां से फूटी कोठी के बीच मेट्रो चलाने की बात थी। क्रॉस रूट में एयरपोर्ट से एमजी रोड होते हुए बंगाली कॉलोनी चौराहे तक मेट्रो चलनी थी। बाद में तीसरा रूट तय कर काम शुरू कर दिया। इस रूट में मेट्रो को अभी ज्यादा यात्री नहीं मिलेंगे, लेकिन इंदौर को बड़ी सौगात मिल जाएगी। मेट्रो रूट की रिंग बनेगी, तब इसका सही और ज्यादा इस्तेमाल हो पाएगा। इसमें करीब 5 साल लग सकते हैं। सौगात का इंतजार करना होगा।
अतुल सेठ, आर्किटेक्ट
इंदौर. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह ने शुक्रवार दोपहर मेट्रो ट्रेन के सुपर कॉरिडोर स्थित स्काडा कंट्रोल सेंटर का दौरा किया। उन्होंने यार्ड एवं थर्ड रेल संबंधी जानकारी ली। इसके बाद उज्जैन रोड स्थित जैतपुरा के 220 केवी अति उच्च दाब सब स्टेशन पहुंचे और यहां से सुपर कॉरिडोर तक मेट्रो के लिए स्थापित की गई 33 केवी पैंथर लाइन से बिजली सप्लाय व्यवस्था देखी।
● एक कोच में 50 लोगों के बैठने और 300 लोगों के खड़े होने की व्यवस्था है। एक ट्रेन की यात्री क्षमता 980 है।
● सभी कोच में एलईडी लाइट लगी है, जो रोशनी के हिसाब से एडजस्ट होगी।
● प्रत्येक कोच की लंबाई 22 तो चौड़ाई 2.9 मीटर है।
● एक कोच में 8 (4-4 दोनों साइड) ऑटोमेटिक गेट हैं। कांच की खिड़कियां हैं। ग्रैब हैंडल, डिजिटल रूट मैप आदि हैं।
मेट्रो स्टेशन पर टिकट खिड़कियां बनाई गई हैं। बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म से टिकट वितरण की संभावना है। ऐप आदि डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए जाएंगे। टिकट क्यूआर कोड आधारित रहेंगे। गेट पर स्वचलित किराया संग्रह (एएफसी) प्रणाली रहेगी। क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद ही स्टेशन में प्रवेश मिलेगा। दो चरण में यात्रियों की चेकिंग होगी, फिर वे ट्रेन में प्रवेश कर पाएंगे।
Updated on:
31 May 2025, 3:31 PM IST
Published on:
31 May 2025, 12:25 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.