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इंदौर में सामने आया ‘संपत्तिकर नामांतरण’ घोटाला, अब IP एड्रेस से होगी जांच

property tax transfer scam: संपत्तिकर खातों का नामांतरण करने के घोटाले में कंम्प्यूटर्स ऑपरेटर्स के नाम सामने आए हैं। जांच के लिए टीम बना दी गई है।
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property tax indore:343 संपत्तिकर खातों का नामांतरण करने का घोटाला (Photo Source: AI Image)

property tax indore:343 संपत्तिकर खातों का नामांतरण करने का घोटाला (Photo Source: AI Image)

property tax indore: एमपी के इंदौर शहर में नगर निगम के राजस्व विभाग में नोटरी के आधार पर करीब 343 संपत्तिकर खातों का नामांतरण करने का घोटाला सामने आया है। इस मामले की तह तक जांच करने के लिए निगमायुक्त ने जहां तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। कमेटी आज से जांच शुरू करेगी और जिन कंम्प्यूटर्स से सारा खेल किया गया है, उनके आइपी एड्रेस से घोटालेबाजों को पकड़ा जाएगा। इधर, कांग्रेस आज निगमायुक्त को घोटाले में शामिल अफसरों को सस्पेंड करने के की मांग को लेकर ज्ञापन देने जा रही है। इसके साथ ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी मामले की संपूर्ण जांच के लिए निगमायुक्त को पत्र लिखने जा रहे हैं।

सामने आए कई नाम

राजस्व विभाग मुख्यालय पर लगभग 343 से अधिक संपत्तिकर खातों का नामांतरण नोटरी के आधार पर हो गया था। ये फर्जी नामांतरण जनवरी से मार्च-2026 के बीच किए गए थे। जिन संपत्तियों में पारिवारिक विवाद था या फिर सालों से लंबित पड़े थे, उनके नामांतरण रात 10 से सुबह 3 बजे के बीच किए गए और नामांतरण के आधार पर रजिस्ट्री हो गई। घोटाले में राजस्व विभाग मुख्यालय के कंम्प्यूटर ऑपरेटर सागर पंवार, मुख्यालय सहायक राजस्व अधिकारी मयूर पाटिल, अजीम खान, अधीक्षक मनीष जैन, उपायुक्त डॉ. केशव सिंह सगर और प्रदीप जैन के नाम सामने आए हैं।

अब इनमें से कौन दोषी है? इसका पता लगाने के लिए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है, जिसमें राजस्व विभाग के अपर आयुक्त आकाश सिंह, आइटी विभाग के अपर आयुक्त अर्थ जैन और आइटी विभाग के अफसर कपिल गेहलोत शामिल हैं। कमेटी आज से मामले की जांच शुरू करेगी और जिन कंम्प्यूटर्स से सारा खेल किया गया है, उनके आइपी एड्रेस से घोटालेबाजों को पकड़ेगी। इसके लिए इंदौर से लेकर भोपाल तक जानकारी एकत्रित की जा रही है ताकि मालूम पड़ जाए कि किस आइपी एड्रेस और आइडी से संपत्तिकर नामांतरण घोटाला किया गया है।

एफआइआर को लेकर निगमायुक्त से करेंगे बात

अपर आयुक्त आकाश सिंह का कहना है कि ज्यादातर फर्जी नामांतरण उपायुक्त सगर की आइडी से किए गए हैं जो कि ऑपरेटर सागर पंवार चलाता था। उपायुक्त जैन की आइडी भी सागर के पास थी। इसलिए घोटाले में प्रथम दृष्टया ऑपरेटर सागर को दोषी मानते हुए उसके खिलाफ पुलिस में एफआइआर करने को लेकर आज निगमायुक्त से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि निगमायुक्त ने जो कमेटी बनाई है, वह आज से मामले की जांच शुरू करेगी और जिन कंम्प्यूटर्स से सारा खेल किया गया है, उनके आइपी एड्रेस से घोटालेबाजों को पकड़ेगी।