अब सरकारी नहीं रह सकेगी एअर इंडिया, 95 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी

अब सरकारी नहीं रह सकेगी एअर इंडिया, 95 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी

Ashutosh Kumar Verma | Updated: 27 May 2019, 06:51:03 PM (IST) इंडस्‍ट्री

  • सार्वजनिक क्षेत्र की विमान कंपनी एअर इंडिया की विनिवेश की तैयारी में जुटी सरकार।
  • इस बार सरकार ने एअर इंडिया में अपनी 95 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार।
  • सहयोगी कंपनियों को बेचने का भी विकल्प तलाश रही सरकार।

नई दिल्ली। अब बहुत जल्द एअर इंडिया ( air india ) के सरकारी विमान कंपनी का तमगा खत्म हो सकता। सरकार एक बार फिर सार्वजनिक क्षेत्र की विमान कंपनी एअर इंडिया की विनिवेश की तैयारी में जुट गई है। इस बार सरकार कंपनी में अपनी 95 फीसदी हिस्सेदारी बेचने और पांच फीसदी कर्मचारियों के लिए ईसॉप के रूप में रखने पर विचार कर रही है।


नागरिक उड्डयन सचिव ने लिखा पत्र

नागरिक उड्डयन मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने एअर इंडिया के विनिवेश पर काम करना शुरू कर दिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने इस बारे में एअर इंडिया को एक पत्र लिखा है। इससे पहले उनकी प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा के साथ एक बैठक हुई जिसमें एअर इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों के वित्त वर्ष 2018-19 के वित्तीय लेखे-जोखे को अंतिम रूप दिया गया।


सहयोगी कंपनियों को बेचने का भी विकल्प तलाश रही सरकार

सरकार अब भी एअर इंडिया से पहले उसकी सहयोगी कंपनियों को बेचने के विकल्प को आगे बढ़ा रही है। दीपम के सचिव अतनु चक्रवर्ती जल्द ही प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को जानकारी दे सकते हैं। सलाहकार कंपनी ईवाई को लेनदेन सलाहकार बरकरार रखा गया है। बोलियां आमंत्रित करने के लिए एक महीने के भीतर निविदा जारी की जा सकती है। पिछली बार सरकार ने कंपनी में 24 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखने की योजना बनाई थी जिसके कारण किसी भी खरीदार ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। सरकार ने एक अलग कंपनी बनाकर एअर इंडिया का करीब 27,500 करोड़ रुपए का कर्ज कम कर दिया है। हालांकि बाजार सूत्रों का कहना है कि कंपनी के कर्ज में और कमी करने की जरूरत है।

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