7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पेट्रोल-डीजल के बाद बढ़ सकते हैं सब्जियों के दाम, समझें पूरा गणित

petrol -diesal की कीमतों में आज फिर इजाफा ट्रांसपोर्टर्स ने दिया किराया बढ़ाने का इशारा बाकी चीजों के दाम में हो सकती है वृद्धि
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Pragati Vajpai

•

Updated: 13 Jun 2020, 1:56 PM IST

petrol diesal price

petrol diesal price

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesal price hike ) में बढ़ोत्तरी थमने का नाम नहीं ले रही। आज लगातार सांतवें दिन महानगरों में पेट्रोल की कीमतों ( petrol price hike ) में 59-61 पैसे और डीजल की कीमतों ( hike in diesal price ) में 50-60 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। आज की कीमतों की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ( current petrol price in delhi ) 74.57 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 75.16 रुपये हो चुकी है तो वहीं तो वहीं डीजल की कीमत 72.81 रुपये से बढ़कर 73.39 रुपये हो गई है।

कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत क्रमश: 77.05, 82.10 और 78.99 रुपये प्रति लीटर है। इसके अलावा इन शहरों में डीजल की बात करें, तो इन महानगरों में इसका दाम क्रमश: 69.23, 72.03 और 71.64 रुपये है।

आवश्यक वस्तुओं पर पड़ सकता है असर ( price effect on essential commodities ) - पिछले 2 सप्ताह में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 5 रूपए का इजाफा हो चुका है। शुक्रवार को ट्रांसपोर्टर्स ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो हमें जल्द ही किराया बढ़ाना पड़ेगा। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का असर अन्त में आम आदमी पर पड़ेगा क्योंकि किराया बढ़ने से फल सब्जी, अनाज जैसी जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ेंगें। जिसका मतलब है कि आम आदमी का बजट खराब होगा।

2 Pan Card रखना है अपराध, 10000 रुपए जुर्माने के अलावा हो सकती है जेल, जानें वापस करने का तरीका

विश्व में सबसे ज्यादा टैक्स भारत में ( tax rate ) – हमारे देश में फिलहाल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर 69 फीसदी टैक्स पड़ रहा है। जो कि विश्व में सबसे ज्यादा है। विश्व के बाकी देशों की फीसदी टैक्स लिया जाता है। खुद भारत में पिछले साल तक टैक्स महज 50 फीसदी था लेकिन कोरोना के हालात में टैक्स और कीमतों का इतना ज्यादा होना आम आदमी की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए ठीक नहीं है।