
navratri 10 colors 2017
जबलपुर। आज से प्रारंभ हो रहे शारदेय नवरात्र में सर्वार्थ सिद्धि योग और हस्त नक्षत्र में मां जगदम्बा अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने आ रहीं हैं। व्रत, उपासना, आराधना, साधना के साथ मां भगवती दुर्गा की दिव्य रूप में स्थापना-प्रतिष्ठा जगह-जगह हुई। इसके साथ ही शहर के प्राचीन देवी मंदिरों में ब्रम्हमुहूर्त में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों का तांता लग गया है। जल ढारने के लिए बड़ी संख्या में श्रृद्धालु देवी मंदिरों में पहुंच रहे है। इस मौके पर मंदिरों को खास रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। इसके साथ ही संस्कारधानी नौ दिन के लिए भक्ति के सराबोर हो गई है।
मां शैलपुत्री का पूजन आज
शारदेय नवरात्र के प्रथम दिवस मां शैलपुत्री का पूजन होगा। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थिर करते हैं।
मनोकामना ज्योति प्रज्जवलित
नवरात्र में त्रिपुर सुन्दरी मंदिर तेवर और शंकराचार्य मठ बगलामुखी मंदिर में अखंड मनोकामना ज्योति प्रज्ज्वलित होगी। बड़ी खेरमाई मंदिर, बूढ़ी खेरमाई मंदिर, काली मंदिर सदर, शारदा मंदिर बरेला एवं मदन महल, खेरमाई मंदिर मानस भवन, कालीमठ मदन महल में अनुष्ठान होंगे, ज्योति-जवारे कलश स्थापना होगी। दुर्गोत्सव पंडालों में कलश स्थापना के साथ प्रतिमाएं विराजित होंगी।
इन देवी मंदिरों में उमड़ी भीड़
मां त्रिपुर सुंदरी- तेवर में मां त्रिपुर सुंदरी की कल्चुरी कालीन प्रतिमा सातवीं शताब्दी की है। प्रतिमा को 25 साल पहले भव्य मंिदर में स्थापित किया गया।
बड़ी खेरमाई- भानतलैया स्थित 800 वर्ष प्राचीन कल्चुरी कालीन प्रतिमा को न्याय की देवी माना जाता है, जहां मां अपने भक्तों को न्याय दिलाती हैं।
मां छोटी खेरमाई- राइट टाउन मानस भवन के समीप स्थित देवी मंदिर 120 साल पुराना है, जहां नवरात्र में श्रद्धालुओं का नौ दिनों में तांता लगा रहता है।
दुर्गा मंदिर, गलगला- करीब 120 वर्ष पुराने मंिदर में मां जगतजननी की भव्य प्रतिमा है, जिनके दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवरात्र में यहां आते हैं।
शीतलामाई मंदिर- घमापुर से कांचघर चौक के बीच लगभग 100 वर्ष पुराने मंदिर है, जिसका सन् 1972 में जीर्णोद्धार किया गया। जो आस्था का केंद्र है।
कालीमठ- दंडीस्वामी कालिकानंद सरस्वती द्वारा करीब 30 वर्ष पहले मठ की स्थापना हुई। नवरात्र में विशेष काली सिद्धी पूजन होता है।
बगलामुखी मंदिर- शंकराचार्य मठ प्रांगण सिविक सेंटर में सन् 2000 में निर्मित भव्य मंदिर में स्थापित देवी मां स्थापना। जहां 9 दिन घट स्थापना होती है।
काली मंदिर, सदर- सातवीं शताब्दी की मां काली की यहां सौम्य रूप में प्रतिमा है। देवी मां के प्रति भक्तों में आगाध श्रद्धा और विश्वास का भाव है।
महाकाली मंदिर, अधारताल- करीब एक दशक पुरानी शक्तिपीठ में चण्डी के रूप में मां जगदम्बा की प्रतिमा है। जिनके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
दुर्गा मंदिर, जोंसगंज- करीब एक दशक पुरानी शक्तिपीठ में चण्डी के रूप में मां जगदम्बा की प्रतिमा है। जिनके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
नवरात्र के नव रंग
शैलपुत्री पूजा- लाल रंग
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां को समस्त वन्य जीव-जंतुओं का रक्षक माना जाता है। इनकी आराधना से आपदाओं से मुक्ति मिलती है।
चंद्र दर्शन- गहरा नीला
चंद्र दर्शन के दिन नीला रंग पहने। नीला रंग शांति और सुकून का परिचायक है। सरल स्वभाव वाले सौम्य व एकान्त प्रिय लोग नीला रंग पसन्द करते हैं।
ब्रह्मचारिणी पूजा- पीला
नवरात्र के दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की आराधना की जाती है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है।
चंद्रघंटा पूजा- हरा
नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की तीसरी शक्ति माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है। मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को भौतिक , आत्मिक, आध्यात्मिक सुख और शांति मिलती है।
कुष्माण्डा पूजा- स्लेटी
नवरात्र के चौथे दिन मां पारांबरा भगवती दुर्गा के कुष्मांडा स्वरुप की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था , तब कुष्माण्डा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी।
स्कंदमाता पूजा- नारंगी
नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता की उपासना से बालरूप स्कंद भगवान की उपासना अपने आप हो जाती है। नारंगी रंग ताजगी का ***** है।
कात्यायनी पूजा- सफेद
नवरात्र के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। कात्यायन ऋषि के यहां जन्म लेने के कारण माता के इस स्वरुप का नाम कात्यायनी पड़ा।
कालरात्रि पूजा- गुलाबी
माँ दुर्गाजी की सातवीं शक्ति को कालरात्रि के नाम से जाना जाता हैं। दुर्गापूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विधान है।देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है।
महागौरी पूजी- आसमानी नीला
दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। जिनके स्मरण मात्र से भक्तों को अपार खुशी मिलती है, इसलिए इनके भक्त अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन और सम्मान करते हुए महागौरी की कृपा प्राप्त करते हैं।
Published on:
21 Sept 2017 12:47 pm
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