
unique memoirs of former PM atal bihari vajpayee
जबलपुर। ग्वालियर की गलियों में पनपी मित्रता, परिवारिक नातेदारी और एकसाथ आरएसएस के स्वयंसेवक होने का जज्बा जिंदगी भर कायम रहा। शहर के वयोवृद्ध साहित्यकार व पत्रकार डॉ भगवतीधर वाजपेयी के साथ उनके पुत्र रवींद्र वाजपेयी ने स्व. अटल बिहारी व उनसे जुड़ी बातें साझा कीं। इसके अलावा भी भाजपा व आरएसएस से जुड़े तमाम लोगों ने अपनी यादों के पन्ने पलटते हुए स्व. वाजपेयी के व्यक्तित्व की खुलकर सराहना की। सभी ने कहा अब ऐसे व्यक्तित्व का मिल पाना मुश्किल है।
पीढि़यों से था नाता
डॉ बाजपेयी का स्व. अटल बिहारी ने पारिवारिक नाता था। दाोनों के पूर्वज मूलत: उप्र के आगरा जिले के बटेश्वर गांव के निवासी थे। दोनों की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में हुई। यहीं दोनों साथ-साथ आरएसएस की शाखाओं में गए। इसके बाद स्व. अटल बिहारी आगे स्नातक, स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के लिए कानपुर चले गए। डॉ बाजपेयी बताते हैं कि वे भी विधि की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद चले गए। दोनों का पुनर्मिलन १९५० में फिर हुआ। जब राष्ट्रधर्म प्रकाशन के समाचार पत्र स्वदेश में दोनों ने साथ काम किया। स्व. अटल बिहारी इसमें संपादक, डॉ भगवतीधर सहसंपादक व स्व. श्यामाप्रसाद मुखर्जी प्रबंध संपादक थे। १९५२ में स्वदेश बंद हो गया। दोनों सखा दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने वीर अर्जुन अखबार में साथ काम किया। आर्थिक तंगी से अखबार बंद होने के चलते डॉ भगवतीधर तो नागपुर आकर युगधर्म समाचार पत्र में काम करने लगे। लेकिन स्व. अटल बिहारी ने पत्रकारिता छोड़ दी और जनसंघ का दामन थाम कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर लिया।
जोशी को दिया गार्ड ऑफ ऑनर
डॉ भगवतीधर के पुत्र व पत्रकार रवीन्द्र बाजपेयी ने बताया कि स्व. अटल बिहारी विनोद प्रिय व एकदम आम आदमी सहज व्यक्ति थे। १९९० में वे जब जबलपुर आए तो सर्किट हाउस क्रमांक २ में ठहरे थे। उस समय विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कैलाश जोशी स्व. अटल से मिलने आए। तत्कालीन परंपरा के अनुसार उनके लिए बिगुल बजने लगा। जैसे ही जोशी ने कक्ष में प्रवेश किया तो अटल खड़े हो गए। जोशी ने आश्चर्य जताया तो वे हंसते हुए कहने लगे कि मैें भी आपको गार्ड ऑफ ऑनर दे रहा हूं। इस पर सभी हंस पड़े।
छलक उठीं पूर्व सांसद की आंखें
पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी की स्व. अटल बिहारी के बारे में बात करते ही आंख भर आईं। उन्होंने भरे गले से कहा कि वाजपेयी इतने दिन बीमार थे, निश्चेत से थे। लेकिन लगता था कि हैं। उनके अवसान से देश को अपूरणीय क्षति हुई। उनके पुत्र आशीष बताते हैं कि स्व. वाजपेयी का उनके परिवार से काफी लगाव था। जब भी वे जबलपुर आते, उनके यहां जरूर आते थे। वाजपेयी को कार से शहर घुमाने का जिम्मा आशीष को ही मिलता था।
Published on:
16 Aug 2018, 9:47 PM IST
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