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मालिक की मौत के बाद रातभर श्मशान घाट में चिता के पास बैठ रोता रहा ये डॉगी, जानिए पूरी कहानी…

Jagdalpur News: ओमप्रकाश अवस्थी का रविवार रात को निधन हो गया था। सोमवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई थी। ऐसा बताया जा रहा है कि, जब तक घर के आंगन में अर्थी थी, तब तक परिजनों के साथ कालू अर्थी के पास ही बैठा रहा।
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जगदलपुर

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Bhupesh Tripathi

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Updated: 2 Feb 2023, 6:04 PM IST

मालिक की मौत के बाद रातभर श्मशान घाट में चिता के पास बैठ रोता रहा ये डॉगी, जानिए पूरी कहानी...

श्मशान घाट में चिता के पास बैठ रोता रहा डॉगी फ़ाइल फोटो

Jagdalpur News: कुत्ते को यूं ही दुनिया में सबसे वफादार जानवर नहीं कहा जाता। इस बात को साबित कर दिखाया अंबेडकर वार्ड में रहने वाले ओमप्रकाश अवस्थी के पालतू कुत्ते(Pet Dog) कालू ने। कालू ने अपने मालिक का साथ मरने के बाद भी नहीं छोड़। अपने मालिक की अंतिम यात्रा से लेकर शमशान घाट में अंतिम संस्कार कार्यक्रम तक मुक्तिधाम में ही रहा। परिवार वालों के लाख कोशिशों के बाद भी वह वापस नहीं लौटा और दूसरे दिन वह घर वापस आया।

जिन्होंने भी देखा, सबकी आंखे नम हो गई
शहर(Jagdalpur) के अंबेडकर वार्ड के रहने वाले ओमप्रकाश अवस्थी(Omprakash Awasthi) का रविवार रात को निधन हो गया था। सोमवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई थी। ऐसा बताया जा रहा है कि, जब तक घर के आंगन में अर्थी थी, तब तक परिजनों के साथ कालू अर्थी के पास ही बैठा रहा। इतना ही नहीं जब अर्थी को कांधा देकर शव वाहन में रखा गया तो कालू भी शव वाहन में जाकर बैठ गया। जिसे उतारने की कोशिश की गई लेकिन वह वाहन से नीचे नहीं उतरा। अंतिम यात्रा में शामिल हुए लोगों ने कहा कि, डॉग शव वाहन में अर्थी के पास बैठकर शमशान घाट गया। परिजनों ने जब शव को मुखाग्नि दी तो उस समय डॉग कालू भी बहुत रोया।

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10 साल पहले सड़क से उठाकर लाए थे कालू को
परिवार वालों से मिली जानकारी के मुताबिक ओमप्रकाश(Omprakash Awasthi) ने 10 साल पहले सडक़ किनारे से कालू(Kalu) को उठाकर अपने घर लाया था। बच्चों की तरफ पाला। उसका नाम कालू भी उन्होंने ही दिया था। ओमप्रकाश ही उसे शाम को टहलाने से लेकर उसे खाना दिया करते थे। दोनो के बीच असीम प्रेम था। कालू भी ओमप्रकाश की सारी बातें मानता था। दोनो के बीच के सबंध को लेकर हमेशा से लोग बात करते रहते थे।

चिता की आग ठंडे होने तक कालू रहा मुक्तिधाम में
अंबेडकर वार्ड के निवासियों ने बताया कि, मुखाग्नि देने के बाद परिजन समेत लोग घर लौट आए थे। लेकिन, कालू चिता के पास रातभर बैठा रहा। हालांकि, देर रात परिवार के सदस्य श्मशान घाट पहुंचकर उसे लाने का प्रयास भी किए। लेकिन वह नहीं आया। दूसरे दिन सुबह उसे घर लाया गया। एक जानवर की अपने मालिक के प्रति वफादारी देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े। परिजनों का कहना है कि, कालू अधिकतर समय ओमप्रकाश(Omprakash Awasthi) के साथ ही रहता था। वे ही उसे नहलाते और खाना खिलाते थे। बाहर घुमाने भी लेकर जाते थे। यही वजह है कि उसका असीम प्रेम था जो उनके जाने के बाद भी नजर आया।

एक जानवर की अपने मालिक के प्रति वफादारी देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े। लोगों ने कहा कि इससे पता चलता है कि प्यार सबके लिए जरुरी है।