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रेल बजट में बस्तर के हिस्से आए 800 करोड़, फिर भी बस्तरवासियों में निराशा, जानें वजह…

Rail Budget: रेल सेवा(Rail Facility) को लेकर मंत्रालय ने भले ही बजट दे दिया हो लेकिन अभी भी रावघाट लाइन का काम आगे बढऩा तेढ़ी खीर नजर आ रहा है। इसके लिए जानकार मानते हैं कि जब तक इस मामले में राज्य केंद्र पर आरोप मढ़ते रहेगा तब तक इसका समाधान होना मुश्किल है।
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जगदलपुर

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Bhupesh Tripathi

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Updated: 5 Feb 2023, 2:06 PM IST

रेल बजट में बस्तर के हिस्से आए 800 करोड़

रेल बजट में बस्तर के हिस्से आए 800 करोड़ फ़ाइल फोटो

Rail Budget: रेल मंत्रालय ने अपने बजट सत्र से जुड़ी पिंकबुक जारी कर दी है। इसमें रेल मंत्रालय ने बस्तर में रेल सेवाओं के विस्तार के लिए 800 रुपए आबंटित किए हैं। इसके बावजूद भी बस्तरवासियों(Bastar) में इस बजट को लेकर कोई खास उत्साह नजर नहीं आ रहा है इसका सबसे अहम कारण है कि कोई नई ट्रेन की सौगात का नहीं मिलतना। इस बजट में दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल लाइन के लिए सबसे अधिक 500 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है।

मालूम हो कि इस लाइन में रावघाट तक रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है, इससे आगे की लाइन बढ़ाने के लिए रेलवे रूची नहीं दिखा रही है। यही वजह है कि बजट जारी होने के बाद भी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि रावघाट से जगदलपुर(Jagdalpur) तक रेल लाइन का काम इस साल आगे बढ़ेगा की नहीं यदि आगे बढ़ेगा तो इसका काम कब तक पूरा होगा। जिससे की बस्तरवासियों(Bastar) को इसकी सेवा का लाभ मिल सके। बजट को लेकर बस्तर में रेल के लिए लड़ रहे लोगों में मिला जुला असर देखने को मिल रहा है।

जनप्रतिनिधियों को रेलवे पर बनाना पड़ेगा दबाव
रेल सेवा को लेकर मंत्रालय ने भले ही बजट दे दिया हो लेकिन अभी भी रावघाट लाइन(Rowghat Line) का काम आगे बढऩा तेढ़ी खीर नजर आ रहा है। इसके लिए जानकार मानते हैं कि जब तक इस मामले में राज्य केंद्र पर आरोप मढ़ते रहेगा तब तक इसका समाधान होना मुश्किल है। इसलिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसके लिए राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक दबाव बनाना पड़ेगा। इसमें फारेस्ट क्लियरेंस(forest clearance) और रेल लाइन को लेकर हुए भ्रष्टाचार को अलग रखकर बस्तरवासियों(Bastar) तक सेवा पहुंचाना शामिल है। इसके लिए एक कदम आगे बढक़र दोनों को ही काम करना होगा तब जाकर बस्तर के राजधानी से जुडऩे का सपना पूरा हो पाएगा।

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कोई नई रेल की सौगात नहीं...लौह अयस्क परिवहन को फिर प्राथमिकता
इस रेल बजट में बस्तर (Bastar in Rail Budget)को कोई भी नई रेल लाइन की सौगात नहीं मिली है, जिसे लेकर बस्तरवासियों में नाराजगी है। ईस्ट कोस्ट रेलवे की तरफ से किरंदूल-विशाखापटनम मार्ग में करीब 400 करोड़ का बजट आबंटित किया है। लेकिन लेकिन इसमें भी रेलवे की पुरानी नीति साफ झलक रखी है। जानकारों का कहना है कि लौह अयस्क परिवहन के लिए जगदलपुर-कोरापुट और जगदलपुर-किरंदूल रेलवे लाइन( Jagdalpur-Kirandul Railway Line)पर दोहरीकरण के लिए बजट आबंटित किया गया है। लोगों का कहना है कि इस काम को पूरा करने के लिए रेलवे अधिकारी तेजी दिखाते हैं क्योंकि इससे उन्हें बड़ा मुनाफा होता है। वहीं रावघाट लाइन को जगदलपुर तक बढ़ाने की दिशा में दक्षिण पूर्व रेलवे का रवैया एकदम उदासीन है। जो कि नाकाबिले बर्दाश्त है।

एक कदम आगे बढ़ कर करना होगा काम
संपत झा, बस्तर रेल आंदोलन ने कहा, रेल बजट में पैसे आबंटित कर दिए गए हैं। लेकिन यदि दल्लीराजहरा-जगदलपुर रूट के लिए एक कदम आगे बढक़र काम नहीं किया गया तो हर साल की तरह यह काम वहीं पर अटका रहेगा। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी विशेष प्रयास करने होंगे। इसमें बस्तरवासियों का पूरा सहयोग है। स्थानीय स्तर पर जो भी दिक्कतें हो इसमें भ्रष्टाचार से लेकर फारेस्ट क्लियरेंस तक के लिए विशेष प्रयास करने से ही राजधानी तक जुडऩे का सपना पूरा होगा। नहीं तो हर साल बजट में राशि आती जाएगी, काम पर ब्रेक लगा रहेगा।

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केंद्र और राज्य मिलकर काम करें
किशोर पारेख, बस्तर रेल आंदोलन ने कहा, रावघाट प्रोजेक्ट पहले से ही बजट में शामिल है। कोई नई सौगात नहीं मिली है। लेकिन केंद्र सरकार ने 500 करोड़ का आबंटन किया है यह स्वागत योग्य है। इससे उम्मीद लगा रहे हैं कि यह प्रोजेक्ट आने वाले दिनों में तेजी से काम करेगा। साथ ही यह भी अपेक्षा है कि केंद्र और राज्य सरकारें इस क्षेत्र को प्राथमिकता में रखकर काम करेंगी। जिसमें मुआवजा, जमीन अधिग्रहण और विवाद जैसी स्थिति को राज्य सरकार और काम न रूके इसके लिए केंद्र सरकार काम करेगी। विवाद की स्थिति जहां है उसे छोडक़र आगे का काम किया जाए।


बस्तर के लोगों को फिर झुनझुना पकड़ा दिया
बस्तर को इस बजट में फिर से झुनझूना पकड़ाया गया है। जिस दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल लाइन के लिए 500 करोड़ का बजट पारित किया गया है वह पहले के बजट में भी शामिल है। कोई नई सौगात नहीं मिली है। डबलिंग के काम को लेकर बजट पारित हो रहा है और इस पर रेलवे अधिकारी तेजी भी दिखा रहे हैं। लेकिन यह तेजी रावघाट प्रोजेक्ट पर नजर नहीं आती। इस बार उम्मीद है कि इस काम में भी तेजी आएगी। इसके लिए रेल लाइन आंदोलन इंतजार कर रहा है। यदि जल्द ही इस पर काम शुरू नहीं होता है तो बस्तरवासियों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। -साकेत शुक्ला, संयोजक, रेल लाइन आंदोलन

रेल बजट में बस्तर को यह मिला
रूट - कुल दूरी - कुल बजट (करोड़ में)
दल्लीराजहरा-जगदलपुर - 235 किमी - 500 करोड़
किरंदूल-जगदलपुर - 150 किमी - 135 करोड
जगदलपुर - कोरापुट - 110.22 किमी - 170 करोड़

लेवल क्रॉसिंग के बदले सबवे -78 करोड़ (किंरदूल-कोत्तावलसा रूट में)
मनीष शर्मा, चेंबर अध्यक्ष व बस्तर रेल आंदोलन ने कहा, रेलवे ने भले ही इस बजट में 900 करोड़ के करीब की राशि बस्तर को दी हो, लेकिन इस पर यहां के लोग खुश नहीं है। वे तब तक इस पर अपनी खुशी जाहिर नहीं कर पाएंगे जब तक जगदलपुर सीधे राजधानी से नहीं जुड़ जाता। इस बजट में नई रेल सेवा की भी उम्मीद लगाई जा रही थी लेकिन बजट ने निराश किया। अब इस साल रावघाट के आगे ट्रेन रूट बढक़र जगदलपुर तक पहुंचानी है वहीं नई ट्रेनों की मांग भी है। इसके लिए रेल मंडल से केंद्र व राज्य सरकार से मुलाकात की जाएगी। जिससे की बस्तरवासियों की मांग पूरी हो सके। नहीं तो आंदोलन किया जाएगा।