
जयपुर। अर्जेंटीना के युवक जपनलैंप के शव का रविवार को एसएमएस अस्पताल में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। रिपार्ट एफ एसएल जांच के लिए भेजी गई है। डॉक्टरों के मुताबिक जपनलैंप की मौत चोट की वजह से हुई है। पूरी स्थिति एफएसएल रिपोर्ट आने पर सामने आएगी। चिकित्सकों का मानना है कि सांड के हमले के दौरान मृतक जपनलैंप गिर गया था, जिससे उसकी गर्दन में चोट लगी, सूजन आ गई और मौत हो गई। पोस्टमार्टम के दौरान अर्जेंटीना दूतावास से काउंसलर मारिया पौउला विगनउ जयपुर आई। माणकचौक थानाधिकारी चेना राम ने बताया कि शव को अर्जेंटीना दूतावास को सौंप दिया गया।
तो बच जाती जपन की जान
समय रहते अवैध डेयरियों पर कार्रवाई हो जाती तो शनिवार को बहन के साथ जन्मदिन मनाने आए अर्जेंटीना निवासी जपन लेम्प की जान बच सकती थी। ब्रह्मपुरी, सिटी पैलेस , हवामहल, चौड़ा रास्ता, जौहरी बाजार समेत बीच चौराहे ऐसे पशुओं की अनदेखी से ही शहर की पर्यटन व्यवस्था और पावणों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है। आवारा पशुओं की लड़ाई और झुंड के कारण अक्सर दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होते हैं।
चौड़ा रास्ता में सांड की टक्कर से विदेशी पर्यटक की मौत के बाद रविवार को नगर निगम प्रशासन अवैध डेयरियों पर कार्रवाई करता नजर आया। कोतवाली थाना और निगम की संयुक्त कार्रवाई में परकोटे समेत शहर के अन्य स्थानों पर अवैध रूप से चल रहीं डेयरियों को हटाया गया। जौहरी बाजार में धुला हाउस, निगम के चौगान गैराज, गलता गेट, चांदपोल क्षेत्र में तोपखाना, मेजर शैतान सिंह कॉलोनी, विद्याधर नगर में मंदिर मोड़ और नाले के पास स्थित अवैध पशु डेयरियों और तबेलों को तोड़ दिया। गोविंदरायजी के रास्ते और नाहरगढ़ रोड स्थित अवैध तबेलों को भी सीज कर दिया गया। पूरी कार्रवाई के दौरान इन अवैध पशु डेयरियों से करीब 100 पशुओं को जब्त किया। आयुक्त रविजैन, अतिरिक्त आयुक्त डॉ. हरसहाय मीणा मौजूद थे। उपायुक्त पशु प्रबंधन शिव भगवान गठाला, उपायुक्त सतर्कता बाघ सिंह आदि अधिकारी थे।
ऐसी फर्म को ठेका, जिसने कभी पशु पकड़े ही नहीं आरटीआई में खुलासा
शहर में आवारा पशु पकडऩे के मामले में लापरवाही बरती जा रही है। तीन माह पहले तो पशु पकडऩे का ठेका ही ऐसी कंपनी को दे दिया,
जो सोफ्टवेयर बनाने का काम करती थी। अब यह ठेका इस कंपनी से ले लिया गया है। निगम हर माह सैकड़ों गाय पकडऩे का दावा करता है,
जमीनी हकीकत बद से बदतर नजर आती है। आरटीआई कार्यकर्ता अमित शर्मा लियो ने बताया कि करीब छह माह पहले निगम से आरटी
आई के तहत जानकारी मिली थी। जिस फर्म के पास ठेका है, वह एक कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर डवलप कम्पनी है। परकोटे में दो दर्जन से अधिक
अवैध डेयरी हैं। इन पर अब तक निगम अंकुश नहीं लगा पाया है। घोसियों का रास्ता, पुरानी बस्ती, हीदा की मोरी, चौगान स्टेडियम, चा
ंदपोल गेट के बाहर दर्जनों डेयरी हैं, जिनके पशु खुले में सडक़ों पर घूमते रहते हैं।
Updated on:
20 Nov 2017, 12:06 PM IST
Published on:
20 Nov 2017, 12:06 PM IST
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